कांग्रेस बोली- भाजपा प्रत्याशी जन्म से पहले 10वीं पास हुईं:नंदीग्राम उपचुनाव हलफनामे में जन्म 1966, 10वीं 1965 में पास की; उम्मीदवारी रद्द करने की मांग
Raisina News Desk- सितंबर 23, 2026 07:52 PM IST
भाजपा उम्मीदवार हसीरानी रथ सीएम शुभेंदु के पीए रहे चंद्रनाथ रथ की मां हैं। चंद्रनाथ की 6 मई को हत्या कर दी गई थी।
बंगाल की नंदीग्राम सीट पर उपचुनाव से पहले एक और विवाद सामने आया है। कांग्रेस ने BJP प्रत्याशी हसीरानी रथ के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। कांग्रेस का दावा है कि BJP प्रत्याशी ने चुनावी हलफनामे में अपनी उम्र और पढ़ाई से जुड़ी गलत जानकारी दी है।
कांग्रेस नेता और वकील रित्जू घोषाल ने कोर्ट में कहा-
हसीरानी रथ ने हलफनामे में जन्म साल 1966 बताया है, जबकि 1965 में माध्यमिक यानी 10वीं की परीक्षा पास करने का जिक्र किया है। हसीरानी ने जन्म से पहले 10वीं कैसे पास कर ली।
नंदीग्राम विधानसभा सीट पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होगा और 9 अक्टूबर को मतगणना होगी। हसीरानी रथ CM शुभेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ की मां हैं। 4 मई को बंगाल चुनाव के नतीजे आने के दो दिन बाद चंद्रनाथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
हसीरानी रथ ने 15 सितंबर को CM शुभेंदु के साथ जाकर नामांकन दाखिल किया था।
स्कूल की मान्यता पर भी सवाल, दावा- सिर्फ 5वीं तक था दर्जा
भाजपा प्रत्याशी ने जिस स्कूल का नाम हलफनामे में दिया गया है, कांग्रेस ने उसके रिकॉर्ड पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी के मुताबिक, चौखाली गंगा पद्म मिलन कन्या विद्यापीठ की शुरुआत 1963 में हुई थी।उस समय वहां 5वीं तक पढ़ाई होती थी।
कांग्रेस के मुताबिक, स्कूल को 10वीं तक पढ़ाने की सरकारी मंजूरी 1973 में मिली थी। रित्जू घोषाल ने कहा कि चुनाव आयोग ने हलफनामे की जांच की थी, लेकिन गड़बड़ी पर कोई कार्रवाई नहीं की।
कांग्रेस ने कहा कि अगर भाजपा प्रत्याशी की शैक्षणिक योग्यता से जुड़ी जानकारी गलत पाई जाती है तो उनकी उम्मीदवारी रद्द की जाए। कांग्रेस की याचिका पर कलकत्ता हाईकोर्ट गुरुवार को सुनवाई करेगा।
भाजपा बोली- हलफनामे में सिर्फ टाइपिंग की गलती
वहीं BJP ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया। पार्टी ने कहा कि हसीरानी की उम्र को लेकर कोई समस्या नहीं है। BJP के मुताबिक, हसीरानी ने 1980 में 10वीं कक्षा में पढ़ाई की थी। पार्टी ने कहा कि हलफनामे में सिर्फ एक टाइपिंग की गलती हुई है।
हसीरानी के नंदीग्राम स्थित ऑफिस ने कहा कि उनका जन्म 1965 में हुआ था और उन्होंने 1980 में 10वीं की पढ़ाई की थी। उन्होंने उस समय बंगाल में लागू माध्यमिक परीक्षा व्यवस्था के तहत मैट्रिक की परीक्षा पास की थी।
अब आगे क्या हो सकता है?
1. हाईकोर्ट BJP प्रत्याशी से जवाब मांग सकता है: हसीरानी रथ की ओर से दस्तावेजों के जरिए बताया जा सकता है कि 1965 और शैक्षणिक योग्यता की जानकारी कैसे दर्ज हुई।
2. मूल दस्तावेज जांचे जा सकते हैं: जन्म प्रमाणपत्र, स्कूल रिकॉर्ड, परीक्षा/सर्टिफिकेट और नामांकन देखे जाएंगे। खासकर यह जांचना होगा कि 1965 वास्तव में 10वीं पास करने का साल है या हलफनामे में गलत दर्ज हुआ है।
3. चुनाव आयोग का जवाब भी महत्वपूर्ण होगा: कांग्रेस का कहना है कि आयोग ने हलफनामा जांचने के बावजूद इस विसंगति पर कार्रवाई नहीं की। इसलिए हाईकोर्ट आयोग से भी जवाब मांग सकता है।
4. अगर जानकारी गलत साबित होती है, तो उम्मीदवारी पर असर का सवाल उठेगा: कांग्रेस ने इसी आधार पर उम्मीदवारी रद्द करने की मांग की है। लेकिन केवल गलती सामने आना और कानूनन उम्मीदवारी रद्द होना दो अलग सवाल हैं। कोर्ट को यह भी देखना होगा कि गलती का नेचर क्या है और चुनाव कानून के तहत उसका क्या परिणाम होगा।
TMC प्रत्याशी ने नाम वापस लिया, ममता ने कांग्रेस को समर्थन दिया
नंदीग्राम उपचुनाव में ममता बनर्जी के TMC गुट ने संचिता प्रधान डे को प्रत्याशी बनाया था। 18 सितंबर को उन्होंने अपना नाम वापस ले लिया। उनके नाम वापस लेने के बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया।
TMC प्रत्याशी ने नाम वापस लेने से पहले CM शुभेंदु से मुलाकात की थी।
समर्थन के कुछ घंटे बाद कांग्रेस प्रत्याशी गिरफ्तार
ममता बनर्जी के समर्थन के ऐलान के कुछ ही घंटे बाद कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को 2007 के एक पुराने आपराधिक मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। मामला नंदीग्राम के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से जुड़ा है।
बाद में प्रधान को अलग-अलग मामलों में न्यायिक हिरासत में भेजा गया। 23 सितंबर को अदालत ने उन्हें एक अन्य 2007 के मामले में 7 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया, जबकि नंदीग्राम में मतदान 6 अक्टूबर को होना है। कलकत्ता हाईकोर्ट 24 सितंबर को प्रधान की याचिका पर भी सुनवाई करेगा।
नंदीग्राम से शुभेंदु ने ममता को हराया, लगातार दो बार भाजपा जीती
नंदीग्राम लंबे समय से TMC और भाजपा के बीच राजनीतिक संघर्ष का प्रमुख केंद्र रहा है। इस क्षेत्र में 2007 के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन ने ममता बनर्जी और TMC को 2011 में सत्ता तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई थी। 2021 में ममता बनर्जी ने यहीं से बंगाल के मौजूदा सीएम शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ चुनाव लड़ा, लेकिन हार गईं।
2026 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम के साथ भवानीपुर सीट से भी चुनाव लड़ा और दोनों जगह जीत दर्ज की। बाद में अधिकारी ने भवानीपुर सीट अपने पास रखी और नंदीग्राम से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद नंदीग्राम सीट खाली हुई।