गणेश महोत्सव में इस मुस्लिम कलाकार की धूम, क्रिस्टल से तैयार करते हैं बप्पा की अनोखी मूर्तियां, हर कोई हैरान
Raisina News Desk- सितंबर 24, 2026 03:36 AM IST
गणेश महोत्सव के मौके पर शहर में जगह-जगह गणपति पंडाल सजाए गए हैं. कहीं फूलों से सजावट की गई है तो कहीं आकर्षक लाइटिंग और अलग-अलग थीम के जरिए पंडालों को खास बनाया गया है. लेकिन उदयपुर में एक कलाकार ऐसे भी हैं, जिनकी पहचान सिर्फ गणेश पंडालों तक सीमित नहीं है. शहर के वकार हुसैन क्रिस्टल आर्ट के जरिए भगवान गणेश की ऐसी प्रतिमाएं तैयार करते हैं, जिन्हें देखकर लोग हैरान रह जाते हैं.
वकार हुसैन क्रिस्टल आर्टिस्ट हैं और बचपन से ही क्रिस्टल से अलग-अलग तरह की कलाकृतियां तैयार कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि छोटी उम्र से ही उन्हें क्रिस्टल से चीजें बनाने का शौक था और धीरे-धीरे यही कला उनकी पहचान बन गई. लेकिन जब उन्होंने क्रिस्टल से भगवान गणेश की प्रतिमाएं बनानी शुरू कीं, तो उनकी कला को एक अलग पहचान मिली.
गणेश महोत्सव के दौरान उनकी बनाई क्रिस्टल गणेश प्रतिमाओं की खास चर्चा होती है. वकार ने क्रिस्टल से गणपति बप्पा की कई तरह की प्रतिमाएं तैयार की हैं। इनमें पंचमुखी गणेश की प्रतिमा भी खास है.बेहद बारीकी से तैयार की गई इन प्रतिमाओं में क्रिस्टल के छोटे-छोटे टुकड़ों और दानों को इस तरह आकार दिया जाता है कि गणेश जी की पूरी आकृति उभरकर सामने आती है.
वकार हुसैन बताते हैं कि भगवान गणेश के प्रति उनकी आस्था ने उन्हें इस कला को और आगे बढ़ाने की प्रेरणा दी
मुस्लिम समुदाय से होने के बावजूद भगवान गणेश के प्रति उनकी श्रद्धा और उनकी कला के प्रति समर्पण ने इस काम को एक अलग पहचान दी है. उनके लिए कला किसी धर्म की सीमा में बंधी नहीं है, बल्कि यह उनकी भावनाओं और मेहनत को लोगों तक पहुंचाने का माध्यम है.
क्रिस्टल से सिर्फ गणेश प्रतिमाएं ही नहीं, बल्कि वकार कई तरह के सजावटी सामान, झूमर और कलाकृतियां भी तैयार करते हैं.उन्होंने क्रिस्टल से राम दरबार भी बनाया है.इसके अलावा क्रिस्टल का बड़ा झूमर तैयार करने के लिए भी उन्हें पहचान मिली है.उनकी बनाई कलाकृतियों को देशभर में पसंद किया जाता है.
गणेश महोत्सव के दौरान जब शहर में गणपति बप्पा की भक्ति का रंग दिखाई दे रहा है, ऐसे समय में वकार की क्रिस्टल कला भी लोगों का ध्यान खींच रही है. उनकी बनाई छोटी से छोटी गणेश प्रतिमा से लेकर बड़ी कलाकृतियां यह बताती हैं कि कला के लिए सिर्फ हुनर ही नहीं, बल्कि लगातार मेहनत और समर्पण भी जरूरी है. वकार आज अपनी इसी कला को आगे बढ़ाने में जुटे हैं, ताकि क्रिस्टल आर्ट की यह बारीक और अनोखी कला आने वाली पीढ़ियों तक पहुंच सके.