
दिल्ली:
Dust Portal 2.0: दिल्ली सरकार ने राजधानी में धूल प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए बड़ा कदम उठाया है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने AI आधारित ‘डस्ट पोर्टल 2.0′ लॉन्च किया है. इस प्लेटफॉर्म में 360 डिग्री कैमरे, GIS मैपिंग, PM-10 और PM-2.5 सेंसर तथा रियल-टाइम एनालिटिक्स तकनीक का उपयोग किया जाएगा. सिस्टम निर्माण स्थलों की निगरानी करेगा और प्रदूषण बढ़ने पर येलो, ऑरेंज और रेड अलर्ट जारी करेगा. नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रोजेक्ट्स को स्वतः नोटिस जारी किए जा सकेंगे. दिल्ली सरकार के अनुसार राजधानी के कुल वायु प्रदूषण में धूल की हिस्सेदारी लगभग 27 प्रतिशत है.
AI संचालित डस्ट पोर्टल 2.0 के माध्यम से दिल्ली में निर्माण स्थलों पर धूल प्रदूषण की निगरानी अब और अधिक स्मार्ट, पारदर्शी और प्रभावी होगी।
500 वर्ग गज या उससे बड़े निर्माण स्थलों की GIS Mapping, 360° Cameras, PM10-PM2.5 Sensors और AI आधारित Real-Time Monitoring के जरिए निगरानी की… pic.twitter.com/NAkdcGWtk3
— DIP – Delhi Government (@dip_delhi) July 14, 2026
दिल्ली सरकार के आंकड़ों के अनुसार, सड़क, मिट्टी और निर्माण गतिविधियों से उत्पन्न धूल राजधानी के वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारण है. ग्रीष्म ऋतु में कुल वायु प्रदूषण में इसकी हिस्सेदारी लगभग 27 प्रतिशत और शीत ऋतु में 15 प्रतिशत तक रहती है. वहीं, पीएम-10 उत्सर्जन में धूल की हिस्सेदारी 66 प्रतिशत और पीएम-2.5 उत्सर्जन में लगभग 38 प्रतिशत है. इसी चुनौती से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए डस्ट पोर्टल 2.0 विकसित किया गया है.
डस्ट पोर्टल 2.0 में जीआईएस मैपिंग, लाइव 360 डिग्री पीटीजेड कैमरे, पीएम-10 और पीएम-2.5 सेंसर, रियल-टाइम एनालिटिक्स और एआई आधारित मॉनिटरिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को शामिल किया गया है. यह पोर्टल निर्माण स्थलों की सटीक मैपिंग करेगा और धूल नियंत्रण से जुड़े पांच प्रमुख मानकों का मूल्यांकन खुद ही करेगा, जिससे निगरानी अधिक निष्पक्ष, पारदर्शी और एकरूप होगी. साथ ही, यह निर्माण स्थलों के निकटतम एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन (एक्यूएमएस) की पहचान कर साइट-स्तरीय डेटा का विश्लेषण करेगा. प्रदूषण का स्तर बढ़ते ही सिस्टम स्वतः येलो, ऑरेंज और रेड अलर्ट जारी करेगा ताकि संबंधित एजेंसियां समय रहते आवश्यक कार्रवाई कर सकें.
अब निर्माण स्थलों पर धूल प्रदूषण की निगरानी होगी पूरी तरह स्मार्ट।
मुख्यमंत्री श्रीमती @gupta_rekha जी ने लॉन्च किया AI-संचालित डस्ट पोर्टल 2.0, जो निर्माण स्थलों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग करेगा।
✅ GIS Mapping
✅ 360° Cameras
✅ AI आधारित Monitoring
✅ Real-Time Pollution Alerts… pic.twitter.com/N5V2k89IYF— Delhi Government (@DelhiGovDigital) July 13, 2026
पोर्टल के माध्यम से अनुपालन प्रमाणपत्र जारी करने और नियमों के उल्लंघन पर एनफोर्समेंट नोटिस स्वतः जारी करने की सुविधा भी उपलब्ध होगी, जिससे कागजी कार्यवाही कम होगी और कार्रवाई की गति तेज होगी. इसके अलावा, जिला-वार निगरानी, प्रदूषण के रुझानों और हॉटस्पॉट विश्लेषण के लिए व्यापक डैशबोर्ड उपलब्ध कराया गया है, जिससे सरकार और संबंधित विभाग डेटा-आधारित निर्णय ले सकेंगे.
लाइव कैमरा फीड, सेंसर डेटा और एआई आधारित विश्लेषण के माध्यम से यह पोर्टल पारदर्शिता और जवाबदेही को और अधिक मजबूत बनाएगा.
डस्ट पोर्टल 2.0 के जरिए दिल्ली में पंजीकृत सभी निर्माण स्थलों की एक ही मंच से निगरानी की जाएगी. इस पोर्टल पर चल रही और पूरी हो चुकी परियोजनाओं की जानकारी, ऑडिट रिपोर्ट, सेंसर से मिलने वाला डेटा और नियमों के पालन से जुड़ी सभी सूचनाएं उपलब्ध होंगी. इससे निर्माण कार्यों की निगरानी आसान होगी, डेटा का बेहतर प्रबंधन हो सकेगा और पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा सकेगा. यह एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म दिल्ली को अधिक स्वच्छ और प्रदूषण-मुक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
आज माननीय मुख्यमंत्री जी ने ‘Dust Portal 2.0’ लॉन्च किया, जिसके माध्यम से दिल्ली की 500 गज या उससे बड़ी सभी कंस्ट्रक्शन साइट्स की AI-इनेबल्ड लाइव मॉनिटरिंग की जाएगी।
निर्माण कार्य के दौरान उड़ने वाली धूल-मिट्टी को नियंत्रित करने में यह पोर्टल बेहद प्रभावी साबित होगा।… pic.twitter.com/Ma5VqN089N
— Manjinder Singh Sirsa (@mssirsa) July 13, 2026
पर्यावरण मंत्री सरदार मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि निर्माण एवं विध्वंस गतिविधियों से उत्पन्न धूल दिल्ली में वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में से एक है. डस्ट पोर्टल 2.0 के माध्यम से पहली बार 500 वर्ग गज या उससे बड़े सभी निर्माण स्थलों की एआई आधारित निगरानी की जाएगी. यह अत्याधुनिक प्रणाली 360 डिग्री कैमरों, सेंसर, जीआईएस और रियल-टाइम डेटा के माध्यम से धूल नियंत्रण उपायों की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करेगी. अब तक निर्माण स्थलों की निगरानी मुख्यतः मैनुअल प्रक्रियाओं पर आधारित थी, जिनमें कई कमियां थीं. नई एआई आधारित व्यवस्था से नियमों के पालन की वास्तविक समय में निगरानी होगी, उल्लंघन होने पर तत्काल अलर्ट जारी होंगे और बार-बार नियम तोड़ने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी. इससे पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनेगी.