पूर्व पीए और ओएसडी पर ED कार्रवाई के बाद हरीश रावत ने कांग्रेस के पदों से दिया इस्तीफा; नोट लिखकर बताई वजह
Raisina News Desk- सितंबर 12, 2026 07:10 AM IST

देहरादून:
उत्तराखंड की राजनीति में शुक्रवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पार्टी के दो महत्वपूर्ण पदों से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी. यह फैसला ऐसे समय आया है जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के बाद उनके पूर्व पीए और करीबी सहयोगी से जुड़े मामले को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है. हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर लंबा बयान जारी कर कहा कि यदि उनके किसी कार्य या उनसे जुड़े किसी विवाद से कांग्रेस पार्टी के भ्रष्टाचार विरोधी संघर्ष को नुकसान पहुंचता है तो वह ऐसी स्थिति नहीं चाहते. इसी कारण उन्होंने अपने पद छोड़ने का निर्णय लिया है.
हरीश रावत ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि टीवी चैनलों पर यह खबर चल रही है कि देहरादून में उनके पूर्व पीए रहे चंदन सिंह जीना के पास से बड़ी मात्रा में नकदी और आभूषण बरामद हुए हैं. उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की सच्चाई आने वाले समय में सामने आएगी, लेकिन यह तथ्य सही है कि चंदन सिंह जीना लंबे समय तक उनके साथ विभिन्न पदों पर कार्य करते रहे हैं. रावत ने कहा कि चंदन सिंह जीना हमेशा से विनम्र और जिम्मेदार व्यक्ति रहे हैं. हालांकि यदि ग्राम सेवकों की भर्ती में ओएमआर शीट से छेड़छाड़ या किसी अन्य प्रकार की अनियमितता के आरोपों के प्रमाण सामने आते हैं तो उस कथित कृत्य के लिए वह स्वयं को शर्मिंदा महसूस करेंगे. उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि उन्हें अभी तक इन आरोपों पर विश्वास नहीं है.
हरीश रावत की पोस्ट
अपने बयान में हरीश रावत ने उत्तराखंड की राजनीति और आगामी चुनावों का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के चुनाव में भारी स्टेक्स हैं. मुझसे जब भी कोई व्यक्ति पूछता था कि चुनाव कब हो रहे हैं? तो मैं हंसी में उनसे कहता था कि भई चुनाव तब होंगे, जब सीबीआई मेरे दरवाजे पर दस्तक देने आएगी. यदि अभी नहीं आई है तो इसका अर्थ है कि चुनाव अगले वर्ष मार्च-अप्रैल में ही होंगे. लेकिन इस बार मेरे घर पर नहीं, मेरे एक सहयोगी के घर पर दस्तक देकर एक नरेटिव बनाने का प्रयास किया गया है. कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस कार्यकर्ता भ्रष्टाचार के खिलाफ लामबंद होकर लड़ रहे हैं. राहुल गांधी जी राष्ट्रीय स्तर पर ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के माध्यम से शिक्षा प्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं.
अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा है कि ऐसे समय में हरीश रावत के किसी भी कृत्य से यदि पार्टी के संघर्ष में कोई कमजोरी आती है, तो मैं ऐसा बिल्कुल नहीं चाहूँगा. इसलिए मैंने अभी अपने ईष्ट देवता का स्मरण करके एक बड़ा निर्णय लिया है कि मैं किसी सरकारी पद पर तो हूं नहीं, की उससे त्यागपत्र दूं! हां मैं, उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी का सदस्य हूं और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस कार्यसमिति का स्थाई आमंत्रित सदस्य हूं और मैं बहुत विनम्रता पूर्वक इन दोनों पदों से हटना चाहूंगा, क्योंकि पार्टी के संघर्ष में कोई कमजोरी मेरी वजह से नहीं आनी चाहिए.
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने बयान में उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि रहा प्रश्न अधीनस्थ सेवा चयन आयोग का? उसका गठन हमने राज्य के नौजवानों के भविष्य को दृष्टिगत रखते हुए किया. हमने पब्लिक सर्विस कमीशन को समय पर परीक्षाएँ लेने के लिए बाध्य किया, यहाँ तक कि दो बार शीर्ष पदों की भर्तियाँ हुईं, हमारे छोटे से कार्यकाल में. हमने भर्ती बोर्ड्स बनाए, मेडिकल भर्ती बोर्ड बनाया, शिक्षा भर्ती बोर्ड बनाया. यदि उस प्रक्रिया के दौरान नियुक्तियों में हमसे कोई एरर ऑफ़ जजमेंट हो गया है, तो मैं उसके लिए उत्तराखंड के लोगों से क्षमा प्रार्थी हूँ. मगर मैं विनम्रता पूर्वक अपना यह दावा दोहराना चाहता हूं कि हमारे 3 वर्ष के कार्यकाल में 42000 से ज्यादा सरकारी पदों पर भर्तियां हुई हैं.
हरीश रावत ने कहा कि जिन लोगों को जिम्मेदार पदों पर नियुक्त किया गया था, उनकी नियुक्ति उस समय उपलब्ध सेवा रिकॉर्ड के आधार पर हुई थी. उन्होंने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति के भविष्य में गलत रास्ते पर जाने का अनुमान पहले से नहीं लगाया जा सकता. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे कोई संगठन यह नहीं जान सकता कि उसके द्वारा जिम्मेदारी सौंपा गया व्यक्ति बाद में किसी विवाद में फंस जाएगा, वैसे ही सरकार भी हर व्यक्ति के भविष्य के आचरण का अनुमान नहीं लगा सकती.
अपने बयान के अंत में हरीश रावत ने कहा कि नियुक्तियों व परीक्षाओं में गड़बड़ी हमारी आने वाली पीढ़ी के भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं और यदि मुझसे जाने-अंजाने में भी कोई ऐसा कृत्य हुआ है, जिससे हमारे राज्य के नौजवानों के भविष्य पर दुष्प्रभाव पड़ा है, तो उसके लिए मैं अपने को प्रताड़ना का पात्र मानता हूं और मैं राज्य के लोगों से इस चूक के लिए क्षमा चाहता हूं और मैं सार्वजनिक रूप से एक अपील भी करना चाहता हूं कि यदि किसी व्यक्ति को इस तरह की की नियुक्तियों के मामले में हस्तक्षेप करने की मेरी संलिप्तता के कोई प्रमाण उनके पास हों तो वो उन प्रमाणों को सीबीआई, ईडी या राज्य पुलिस को जरूर उपलब्ध करवाएं. क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति को जिसे बड़े दायित्व को संभालने का अवसर मिलता है तो उन्हें हमेशा इस तरीके के घृणित प्रलोभनों से बचना चाहिए और यदि मुझसे कोई ऐसी चूक हुई है तो पुनः दोहरा रहा हूं कि मैं अपने को दंड का पात्र समझता हूं और कानून को मुझे दंडित करना चाहिए.