दुनिया पर राज करेंगे 'मेड इन इंडिया' मोबाइल, सबसे बड़ी स्कीम का ऐलान, भारत में एप्पल के विस्तार का भी प्लान
Raisina News Desk- अगस्त 22, 2026 04:33 AM IST

नई दिल्ली:
भारत सरकार ने मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को मंजूरी दी है. इस स्कीम के तहत आईफोन बनाने वाली कंपनी ऐपल भारत में अब मैकबुक्स और आईपैड्स जैसी डिवाइस भी बनाएगी. इस तरह ऐपल की ओर से भारत में अपने निवेश और मैन्युफैक्चरिंग में बड़ा इजाफा किया जाएगा. आईटी मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव ने इसकी जानकारी दी है. उन्होंने यह भी बताया कि भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का ईकोसिस्टम तैयार किया जाएगा. इसके तहत देश में डिजाइन और रिसर्च को बढ़ावा दिया जाएगा. यह स्कीम 5 साल का लक्ष्य लेकर तैयार की गई है, जो वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक चलेगी.
इसके तहत भारत में मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया जाएगा. इसके अलावा भारतीय मोबाइल फोन ब्रांड्स को मदद की जाएगी. भारतीय मोबाइल कंपनियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के मुकाबले खड़ा करने, घरेलू सप्लाई चेन मजबूत करने और भारतीय ब्रांड्स तैयार करने पर फोकस होगा. इसके लिए 62,500 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है. अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सरकार इस बात पर जोर है कि भारत में डिजाइन की क्षमता को बढ़ावा दिया जाए. खासतौर पर सरकार चाहती है कि भारतीय मोबाइल कंपनियों को मजबूत किया जाए, जिससे वे वैश्विक स्तर पर खड़ी हो सकें और मुकाबले में आएं.
उन्होंने कहा कि सरकार ने फिलहाल तीन स्मार्टफोन कंपनियों को चुना है, जो अगले 10 से 14 महीनों में उभर सकती हैं. इन कंपनियों से कहा गया है कि वे दुनिया के बाजार से मुकाबले के लिए कुछ अच्छे फोन डिजाइन तैयार करें. यह भी कहा गया है कि वे जिस सेगमेंट में उतरना चाहती हैं, उसके हिसाब से डिजाइन तैयार करें. फिर इन्हें मदद की जाएगी. अश्विनी वैष्णव ने कहा कि हमारा फोकस सिर्फ इतने पर ही नहीं है कि भारतीय कंपनियां फोन बनाएं. हमारा फोकस यह भी है कि घरेलू कंपनियों का अपना इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी हो, प्रोडक्ट डिजाइन हो और तकनीकी दक्षता भी मजबूत हो.
स्कीम का जो नोटिफिकिशन जारी हुआ है, उसके मुताबिक भारतीय कंपनियों का ब्रांड स्थापित होना चाहिए. उसका अपना इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी होना चाहिए. इन कंपनियों की शेयरहोल्डिंग को लेकर भी सरकार काफी सजग है. स्कीम के अनुसार इन कंपनियों का नियंत्रण और मैनेजमेंट भारतीयों के हाथ में रहेगा. इसके अलावा भारतीय मूल के नागरिकों के पास ही करीब 51 फीसदी शेयर रहेंगे. इन कंपनियों का रिसर्ड एंड डिवेलपमेंट भारत में ही रहेगा. अश्विनी वैष्णव ने कहा कि कंपनियों की ओर से तैयार किए जाने वाले डिजाइनों का निरीक्षण करने के बाद हम तय करेंगे कि किन्हें सपोर्ट करना है.