क्या ये थी नेपाल में आए भीषण सैलाब की सबसे बड़ी वजह, एक्सपर्ट ने खोला राज
Raisina News Desk- अगस्त 29, 2026 11:15 AM IST

नेपाल में आई बाढ़ से भारी नुकसान हुआ है. इस भीषण बाढ़ और भारी तबाही के लिए चीन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं. ऐसे में लोग यह भी जानना चाह रहे हैं कि नेपाल में इतनी भयानक बाढ़ आने की वजह क्या है. रक्षा विशेषज्ञ पीके सहगल ने इस मामले में अहम जानकारी दी है. उनका कहना है ‘चीन समय पर पारदर्शी शुरुआती चेतावनी जारी करता तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता था, उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर नेपाल के लोग खुलकर चीन को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. सहगल ने दावा किया कि चीन के भारी-भरकम निर्माण, बांध, नदी मोड़ने की परियोजनाओं, टनलिंग और नई सड़कें काटने से नाजुक हिमालयी इकोलॉजी बुरी तरह प्रभावित हुई है, जबकि चीन के अपने इंजीनियरों और फैसले लेने वालों ने भी इसके खिलाफ चेतावनी दी थी, लेकिन चीनी प्रतिष्ठान ने इसे नजरअंदाज कर दिया था.
पीके सहगल ने दावा किया है कि चीन की परियोजनाओं की वजह से नेपाल में ये त्रासदी आई, रिटायर्ड मेजर का मानना है ‘चीन के भारी-भरकम निर्माण कार्यों के कारण स्थानीय इकोलॉजी, जो पहले से ही बेहद नाजुक है, बुरी तरह से प्रभावित हुई है. चीन के अपने इंजीनियरों ने भी इन नाजुक इलाकों में बड़े पैमाने पर निर्माण, बांध बनाने, नदी मोड़ने की परियोजनाओं, टनलिंग और नई सड़कें काटने के खिलाफ सलाह दी थी. साथ ही यह चेतावनी दी थी कि यह हानिकारक होगा. चीन के निर्णय लेने वालों ने भी चिंताएं जताई थीं, लेकिन चीनी प्रतिष्ठान ने उन्हें नजरअंदाज कर दिया था. जिसके चलते इतना बड़ा हादसा हुआ.’
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नेपाल में आई बाढ़ के बाद चीन के प्रति नेपाल के लोगों का गुस्सा भी दिखा है. सोशल मीडिया पर नेपाल के लोग खुलकर इस भीषण बाढ़ के लिए चीन को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. पीके सहगल का कहना है कि अगर चीन कुछ पहले भी आगाह कर देता तो भारी नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता था. लेकिन ऐसा नहीं हुआ, जिसके चलते बाढ़ तेजी से बढ़ी और सबकुछ बहा ले गई.
नेपाल में बुधवार को अचानक से भारी बाढ़ आई थी. इसकी मुख्य वजह विशालकाय ग्लेशियर का अचानक टूटना बताया गया था. हिमालय की लैंगटांग लिरुंग चोटी पर करीब 17000 फीट की ऊंचाई से बर्फ और भारी चट्टानों का एक बहुत बड़ा हिस्सा टूटकर सीधे नीचे घाटी में जा गिरा. वैज्ञानिकों के मुताबिक इस टक्कर की तीव्रता इतनी जबरदस्त थी कि इससे 5.2 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए. इस टकराव से पैदा हुई प्रचंड ऊर्जा ने न केवल बर्फ को तुरंत पानी में बदल दिया, बल्कि पहाड़ों पर मौजूद भारी मलबे, कीचड़ और बोल्डरों को भी अपने साथ समेट लिया. जब यह तेजी से नीचे आया तो उसने ल्हेंदे नदी का रास्ता रोककर वहां एक खतरनाक अस्थाई प्राकृतिक झील बना दी.
नेपाल में बुधवार को आई बाढ़ के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है. अब तक 586 शव निकाले जा चुके हैं. जबकि 2500 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं. पानी उतरने के बाद कुछ लोग वापस अपने घरों में पहुंचे हैं, जहां तबाही के निशाना साफ दिखाई दे रहे हैं. यहां घरों में मलबा जमा हुआ है. फिलहाल नेपाल की सेना और पुलिस की तरफ से लगातार राहत और बचाव कार्य चलाया जा रहा है.
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