ISRO ने रचा इतिहास, लॉन्च किया EOS-05; पहले जियो इमेजिंग सैटेलाइट मिशन की 10 बड़ी बातें जानिए
Raisina News Desk- सितंबर 04, 2026 07:12 AM IST

श्रीहरिकोटा:
भारतीय स्पेस एजेंसी (ISRO) ने आज यानी 4 सितंबर को तड़के 2:55 बजे सतीश धवन स्पेस सेंटर, एसएचएआर के दूसरे लॉन्च पैड से ईओएस-05 अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट ले जाने वाले जीएसएलवी-एफ17 को लॉन्च किया. यह मिशन सफलतापूर्वक पूरा हो गया है. सैटेलाइट को तय कक्षा (सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट) में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया है. यह मिशन EOS-05 को सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में ले जाएगा. GSLV-F-17 भारत के जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल की 19वीं उड़ान है और यह ईओएस-05 को ले जाएगा, जिसे जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से भारत का पहला इमेजिंग सैटेलाइट बताया जा रहा है. इस मिशन की 10 खास बातें यहां जानिए.
#WATCH | Sriharikota, Andhra Pradesh: ISRO’s GSLV-F17/EOS-05 mission has been successfully accomplished. The satellite has been successfully placed into the intended orbit (Sub-Geosynchronous Transfer Orbit).
(Source: ISRO) pic.twitter.com/U9uS5i8ppM
— ANI (@ANI) September 3, 2026
PSLV रॉकेट की लगातार दो नाकामियों और करीब आठ महीने के अंतराल के बाद ISRO ने आज GSLV-F17 के जरिए EOS-05 सैटेलाइट को लॉन्च किया. यह मिशन एजेंसी के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
EOS-05 (पूर्व नाम GISAT-1A) को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह पृथ्वी से लगभग 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई से भारत पर लगातार नजर रख सकेगा.
#WATCH | Sriharikota, Andhra Pradesh: ISRO Chief V Narayanan says, “I am very happy to announce that the GSLV-F17 vehicle has successfully and precisely injected the Advanced Earth Observation Satellite 05, the geo-imaging star satellite, in the intended and required orbit…… pic.twitter.com/bW6mHJ3wzL
— ANI (@ANI) September 3, 2026
यह सैटेलाइट भारत की सीमाओं, समुद्री क्षेत्रों, वेदर सिस्टम और आपदा संभावित इलाकों पर रीयल-टाइम निगरानी की क्षमता प्रदान करेगा. इसमें हाई-रिजॉल्यूशन इमेजिंग सिस्टम लगाया गया है.
EOS-05 को जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से काम करने वाला भारत का पहला इमेजिंग सैटेलाइट बताया जा रहा है. यह पारंपरिक लो-अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट की तुलना में अलग और ज्यादा जानकारी देगा.
GSLV-F17, भारत के जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल प्रोग्राम की 19वीं उड़ान है और यह ISRO की भारी पेलोड लॉन्च करने की क्षमता को दर्शाती है.
GSLV-F17 की ऊंचाई 51.7 मीटर है और इसका लिफ्ट-ऑफ वजन 420.5 टन है. यह भारत के सबसे बड़े परिचालन लॉन्च व्हीकलों में शामिल है.
ISRO EOS-05 Mission
रॉकेट में तीन-स्टेज डिजाइन है. पहले चरण में S-139 सॉलिड मोटर और चार लिक्विड स्ट्रैप-ऑन बूस्टर लगे हैं, जो प्रक्षेपण के समय जबरदस्त थ्रस्ट प्रदान करते हैं.
अंतिम चरण में स्वदेशी क्रायोजेनिक अपर स्टेज (CUS-5) का इस्तेमाल किया जाएगा, जो लिक्विड हाइड्रोजन और लिक्विड ऑक्सीजन से संचालित होता है. यही चरण सैटेलाइट को निर्धारित ऑर्बिट में स्थापित करेगा.
EOS-05 का लॉन्च वजन करीब 2,367 किलोग्राम है. इसे पृथ्वी निगरानी के लिहाज से भारत के महत्वपूर्ण और एडवांस सैटेलाइट में गिना जा रहा है.
मिशन सफल रहने पर भारत को सीमाई निगरानी, चक्रवात, बाढ़, जंगलों की आग और अन्य प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी में बड़ी मदद मिलेगी. इससे रणनीतिक और नागरिक दोनों क्षेत्रों में देश की क्षमताएं मजबूत होंगी.