भारत पर आने वाला है प्रचंड अल नीनो का साया! विश्व मौसम संस्थान ने दी बड़ी चेतावनी
Raisina News Desk- सितंबर 04, 2026 01:08 PM IST

नई दिल्ली:
सर्दी के महीनों में भी गर्मी की चुनौती के साथ अल नीनो फिर से वापस आ रहा है. इस बार और खतरनाक तरीके से. इसका असर करोड़ों जिंदगियों पर पड़ सकता है. संयुक्त राष्ट्र संघ की मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने गुरुवार को जारी नई ग्लोबल रिपोर्ट में अल नीनो के लिए नई चेतावनी जारी की है. इसके अनुसार प्रशांत महासागर में बढ़ती असाधारण गर्मी दुनिया के मौसम के लिए एक बड़ी चेतावनी बन गई है. WMO का कहना है कि अल नीनो अब पूरी तरह से सक्रिय हो चुका है, जो आने वाले कुछ महीनों में बेहद भयानक रूप से ले सकता है. यह फरवरी 2027 तक बना रह सकता है. इसका मतलब है कि सितंबर से नवंबर 2026 के दौरान दुनिया के ज्यादातर भू-भागों में सामान्य से अधिक तापमान रहने का अनुमान है.
WMO के वैज्ञानिकों ने बताया कि प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से 2.6 डिग्री सेल्सियस तक ऊपर पहुंच चुका है. ऐसे में अल नीनो के फरवरी 2027 तक बने रहने की करीब 100 फीसदी आशंका है. समुद्र की यह असाधारण गर्मी दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मौसम के संतुलन को बिगाड़ सकती है. बात भारत की लिहाज से करें तो यहां भी इसका प्रचंड असर दिख सकता है.
WMO ने बताया कि 22 अगस्त को समुद्र की सतह का वैश्विक औसत तापमान रिकॉर्ड 21.1 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया. वैज्ञानिकों ने इसे महासागरों पर बढ़ते जलवायु दबाव और आने वाले खतरों की गंभीर चेतावनी बताया है.
UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा, ‘दुनिया एक ऐसे दौर में पहुंच रही है जहां समुद्र और धरती दोनों लगातार गर्म हो रहे हैं. इससे मौसमी घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है.” उन्होंने कहा कि इस बढ़ते जोखिमों के बीच लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है.
अल नीनो पर WMO की ये चेतावनी भारत के लिए भी खतरे की घंटी जैसी है. ऐसे ही इस साल भारत में मॉनसून सीजन पर अल-नीनो का साया रहा है. अब तक 01 जून से 02 सितम्बर 2026 के बीच देशभर में औसत से 13% कम बारिश रिकॉर्ड की गई है. अब अल नीनो का असर फरवरी 2027 तक रहने की बात कही जा रही है. जिससे भारत में भी मौसम जनित कई समस्याएं आ सकती है.
इस संबंध में IMD का कहना है कि फिलहाल भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में मजबूत अल नीनो की स्थिति बनी हुई है, जिसके आने वाले महीनों में और मजबूत होने की उम्मीद है. ऐसे में जून, जुलाई और अगस्त के बाद अब सितंबर 2026 के दौरान भी पूरे देश में औसत से कम बारिश होने का अनुमान है.
मौसम विभाग के मुताबिक, सितंबर महीने के दौरान देश के अधिकतर हिस्सों में मासिक औसत अधिकतम तापमान भी सामान्य से अधिक रहने की संभावना है. इस दौरान मासिक औसत न्यूनतम तापमान भी देश के अधिकतर हिस्सों में सामान्य से अधिक रहने की उम्मीद है. अक्टूबर, नंवबर में जब भारत में सर्दी की शुरुआत होती है, तब अल नीनो के कारण गर्मी का असर दिखेगा. दिसंबर, जनवरी में बहुत ज्यादा सर्दी नहीं पड़ेगी.
एक्सपर्ट की मानें तो भारत पर शायद इसका तुरंत असर शायद कम हो, लेकिन लंबे समय में मुश्किलें आ सकती हैं. HT से बात करते हुए स्काईमेट के वाइस-प्रेसिडेंट महेश पलावत ने कहा कि लौटते हुए मॉनसून पर इसका असर शायद कम होगा, लेकिन आने वाले महीनों पर असर पड़ेगा. उन्होंने बताया, ‘इससे बारिश के बंटवारे में बदलाव हो सकता है. तापमान बढ़ सकता है. लौटते हुए दक्षिण-पश्चिम मॉनसून पर इसका तुरंत असर सीमित हो सकता है, लेकिन यह उत्तर-पूर्व मॉनसून को प्रभावित कर सकता है.”
यह भी पढ़ें – बेहद खतरनाक हो सकता है अल नीनो, भारत समेत दुनियाभर में बाढ़, सूखा और हीटवेव का अलर्ट, UN की चेतावनी