राष्‍ट्रपत‍ि की ADC नव्‍या शेखावत के दादा रहे विंग कमांडर, बताई पोती के संघर्ष की पूरी कहानी

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की एडीसी मेजर नव्या शेखावत फौजियों वाले परिवार से हैं. वह दादा और पिता के बाद अपने परिवार से सैन्य अफसर बनने वाली तीसरी पीढ़ी हैं. नव्या शेखावत मूल रूप से राजस्थान के सीकर जिले के खंडेला ब्लॉक के गांव केरपुरा की रहने वाली हैं. छोटे से गांव से राष्ट्रपति के एडीसी पद पर पहुंचने वाली नव्या शेखावत राजस्थान की पहली बेटी हैं. नव्या शेखावत के दादा रिटायर्ड विंग कमांडर भंवर सिंह शेखावत ने एनडीटीवी से खास बातचीत में पोती के जन्म से लेकर एडीसी बनने तक की पूरी कहानी शेयर की है.

नव्या शेखावत के दादा का साक्षात्कार

मेजर नव्या शेखावत के दादा भंवर सिंह शेखावत भारतीय वायुसेना से रिटायर हो चुके हैं. उन्होंने पोती के इतिहास रचने पर गर्व जताते हुए कहा कि नव्या शेखावत भारतीय सेना में राष्ट्रपति की एडीसी बनने वाली पहली महिला अफसर हैं. उन्हें उसकी क्षमताओं पर पूरा भरोसा है. उसे बड़ी जिम्मेदारी मिली है, जिसे वह बखूबी निभा लेगी, क्योंकि पोती नव्या की बचपन से ही आदत रही है कि वह कभी भी जिम्मेदारियों से डरती नहीं है. वह जो भी करती है, दिल से करती है.  

नव्या शेखावत की शिक्षा, सीडीएस में सातवीं रैंक

नव्या शेखावत के पिता ग्रुप कैप्टन हैं. पिता की पोस्टिंग की वजह से नव्या की शुरुआती पढ़ाई दिल्ली समेत कई शहरों से हुई. उन्होंने राजस्थान के सीकर जिले के लक्ष्मणगढ़ स्थित मोदी संस्थान से अर्थशास्त्र में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की. दादा व पिता की तरह सेना में जाने के लिए उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज परीक्षा पहले ही प्रयास में पास की. सीडीएस में नव्या शेखावत ने महिला वर्ग में देशभर में 7वीं रैंक और राजस्थान में पहला स्थान प्राप्त किया.  

नव्या शेखावत का लेफ्टिनेंट से मेजर तक का सफर

सीडीएस में सफल होने के बाद नव्या शेखावत के सैन्य अफसर बनने की शुरुआत हुई. उन्हें ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी चेन्नई में दाखिला मिला. सीडीएस (1) 2020 की ऑफिशियल मेरिट लिस्ट में उन्होंने ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी चेन्नई शॉर्ट सर्विस कमीशन वूमेन (नॉन-टेक्निकल) कोर्स में जगह बनाई. वह साल 2021 में पास आउट हुईं और भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में शामिल हुईं. तीन साल बाद कैप्टन और पांच साल बाद मेजर बनीं. वह 2025 से राष्ट्रपति भवन में सेवाएं दे रही हैं. लंबी ट्रेनिंग के बाद 2026 में हाल ही में उन्हें राष्ट्रपति का एडीसी नियुक्त किया गया है.

नव्या शेखावत का गांव से जुड़ाव

दादा भंवर सिंह शेखावत ने बताया कि पोती नव्या शेखावत का जन्म 1998 में हुआ. वर्तमान में वे अपने परिवार के साथ दिल्ली में रहती हैं, मगर उनका अपने गांव केरपुरा से जुड़ाव बचपन से रहा है. वह अक्सर गांव आती रहती हैं. आखिरी बार 6-7 माह पहले गांव आई थीं. यहां सबसे आत्मीयता से मिलीं, बातें कीं और अब नव्या के एडीसी बनने पर पूरा गांव गौरवान्वित महसूस कर रहा है. 

मेजर नव्‍या शेखावत का गांव केरपुरा सीकर ज‍िले में खंडेला के पास है, जो जयपुर से दो घंटे की दूरी पर है.

यशस्वी सोलंकी के बाद नव्या दूसरी महिला अफसर

संसद टीवी ने 16 सितंबर 2026 को अपनी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए जानकारी दी कि मेजर नव्या शेखावत राष्ट्रपति की सहायक के रूप में सेवा करने वाली पहली महिला भारतीय सेना अधिकारी हैं. इस पद तक पहुंचने वाली नव्या शेखावत दूसरी महिला अधिकारी हैं. उनसे पहले साल 2025 में भारतीय नौसेना की लेफ्टिनेंट कमांडर यशस्वी सोलंकी पहली महिला एडीसी बनी थीं.  

एडीसी का क्या काम होता है?

इन दिनों राष्ट्रपति एडीसी का पद चर्चा में है. हाल ही में एडीसी मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने महज 30 साल की उम्र में सेना से रिटायरमेंट ले लिया. ऋषभ सिंह सांब्याल के बाद अब मेजर नव्या शेखावत का नाम सुर्खियों में है. ऐसे में जानिए कि आखिर एडीसी को क्या-क्या काम करने होते हैं.

संसद टीवी के अनुसार, एडीसी राष्ट्रपति के सबसे करीबी सैन्य सहायक होते हैं, जो राष्ट्रपति और सशस्त्र बलों के बीच संवाद स्थापित करते हैं. इसके अलावा किसी भी समारोह में राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल को मैनेज करने की जिम्मेदारी भी एडीसी की होती है.

एडीसी का चयन कैसे होता है?

भारत में किसी भी युवा सैन्य अफसर को राष्ट्रपति का एडीसी बनने का अवसर मिलना सबसे बड़ा सम्मान होता है. बेहतरीन सर्विस रिकॉर्ड वाले युवा अफसर ही एडीसी पद तक पहुंच पाते हैं. उनमें लीडरशिप क्वालिटी, ऑपरेशनल परफॉर्मेंस और उनका सर्विस रिकॉर्ड चयन का आधार होता है.   



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