लद्दाख में महिलाओं ने रोका प्रदर्शन, प्रशासन ने मानी मांगें, आदेश जारी करने के लिए मांगा वक्त
Raisina News Desk- अक्टूबर 30, 2026 12:06 AM IST
लद्दाख में महिलाओं की तरफ से शराब नीति और शराब की बिक्री के खिलाफ किया जा रहा एक सप्ताह लंबा विरोध प्रदर्शन गुरुवार (29 अक्टूबर, 2026) को देर शाम प्रदर्शनकारियों और केंद्र शासित प्रदेश (UT) प्रशासन के बीच एक समझौता होने के बाद एक हफ्ते के लिए रोक दिया गया है. प्रशासन की तरफ से समझौते की शर्तों को लागू करने के लिए एक हफ्ते का समय मांगे जाने के बाद, इस विरोध प्रदर्शन को 5 नवंबर तक के लिए स्थगित कर दिया गया है.
लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा और महिला प्रतिनिधियों के बीच एक उच्च-स्तरीय बैठक हुई, जिसमें प्रशासन सिर्फ ‘ड्राई यूनियन टेरिटरी’ (शराब मुक्त केंद्र शासित प्रदेश) बनाने की संभावना पर चर्चा करने के लिए सहमत हुआ.
केंद्र शासित प्रदेश में पूर्ण शराबबंदी चाहती हैं लद्दाकी महिलाएं
प्रशासन ने पर्यटन, रोजगार और अवैध शराब की तस्करी जैसे सामान्य मुद्दों का हवाला दिया, लेकिन इससे प्रदर्शनकारी संतुष्ट नहीं हुए. वे अब शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और लद्दाख को ‘ड्राई स्टेट’ (शराब मुक्त क्षेत्र) घोषित करने की मांग कर रहे हैं.
चार महिला संगठनों – लद्दाख बौद्ध एसोसिएशन महिला विंग, अंजुमन-ए-इमामिया महिला विंग, अंजुमन मोइन-उल-इस्लाम महिला विंग और ईसाई समुदाय महिला विंग – की तरफ से संयुक्त रूप से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि लद्दाख प्रशासन, केंद्र शासित प्रदेश की शराब नीति पर लद्दाख के धार्मिक महिला संगठनों की ओर से रखे गए सभी बिंदुओं और सुझावों पर सैद्धांतिक रूप से सहमत हो गया है.
लद्दाख प्रशासन की तरफ से क्या कहा गया?
यह आश्वासन केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के गृह विभाग की तरफ से ‘सभी धार्मिक महिला संगठनों की ओर से प्रस्तावित अंतरिम सहमति’ के जवाब में एक लिखित पत्र के माध्यम से दिया गया है. इस पत्र (F. No: Home/UTL/23/2026/4479-80, दिनांक 29.10.2026) पर गृह विभाग की विशेष सचिव ताशी डोलमा (JKAS) के हस्ताक्षर हैं.
लद्दाख बौद्ध एसोसिएशन महिला विंग, अंजुमन-ए-इमामिया महिला विंग, अंजुमन मोइन-उल-इस्लाम महिला विंग और ईसाई समुदाय महिला विंग की अध्यक्षों को लिखे गए इस पत्र में, केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ने बातचीत और सहयोग की भावना को ध्यान में रखते हुए, इस समझौते को अंतिम रूप देने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा है.
इस अनुरोध का सम्मान करते हुए, महिला संगठनों ने 29 अक्टूबर से 5 नवंबर तक, एक सप्ताह के लिए अपना धरना अस्थायी रूप से स्थगित करने का निर्णय लिया है. इससे केंद्र शासित प्रदेश (UT) प्रशासन को अपना वादा पूरा करने और सहमति बनी सभी बातों को लिखित रूप में औपचारिक रूप देने का मौका मिलेगा.
प्रदर्शनकारियों और प्रशासन के बीच सहमति बनने पर बोले वांगचुक
महिला समूहों ने कहा, ‘इस स्थगन को प्रशासन के आश्वासन पर हमारे भरोसे के रूप में देखा जाना चाहिए. महिला संगठन लद्दाख के लोगों को उनके भरपूर समर्थन के लिए धन्यवाद देते हैं.’
पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रदर्शनकारियों के इस फैसले की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि UT प्रशासन की तरफ से सभी मांगें मान लिए जाने और समझौते को अंतिम रूप देने के लिए एक सप्ताह का समय मांगे जाने के बाद आंदोलन को फिलहाल रोक दिया गया है. समझौता होने के बाद सोनम वांगचुक ने कहा, ‘उम्मीद है कि व्यवस्था में उनके भरोसे और विश्वास का सम्मान किया जाएगा.’
अलग-अलग धार्मिक समुदायों की महिलाओं ने किया था प्रदर्शन
लद्दाख बौद्ध संघ की महिला शाखा की अध्यक्ष कुन्जेस डोलमा ने कहा कि इलाके में शराब की नई दुकानें खुलने के बाद अलग-अलग धार्मिक समुदायों की महिलाओं को विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ा. लेह के NDS मेमोरियल पार्क में बौद्ध, मुस्लिम और ईसाई समुदायों की महिला शाखाओं के नेतृत्व में 24 घंटे चलने वाला धरना दिया जा रहा था. उनकी मांग है कि शराब लाइसेंसिंग की उदार नीतियों को पूरी तरह से वापस लिया जाए.
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