चक्रवात 'अर्नब' का साया हटा नहीं कि समुद्र में फिर उठा बवंडर, अगले 48 घंटे अहम; IMD का अलर्ट जारी

चक्रवात 'अर्नब' का साया हटा नहीं कि समुद्र में फिर उठा बवंडर, अगले 48 घंटे अहम; IMD का अलर्ट जारी

नई दिल्ली: बंगाल की खाड़ी में एक बार फिर मौसमी हलचल बढ़ने के संकेत मिले हैं. दक्षिण अंडमान सागर के ऊपर बने कम दबाव के क्षेत्र के अगले 48 घंटों में डिप्रेशन में बदलने की संभावना जताई गई है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार यह सिस्टम पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ सकता है. इसके असर को देखते हुए बंगाल की खाड़ी के आसपास मौसम की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है. इस बीच चक्रवाती तूफान अर्नब कमजोर पड़ चुका है. इसके अवशेष दक्षिण छत्तीसगढ़ और उससे सटे ओडिशा के आसपास डिप्रेशन के रूप में बने हुए हैं. मौसम रडार इस सिस्टम की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहे हैं. हालांकि नए सिस्टम के ओडिशा पर संभावित असर को लेकर फिलहाल अलग से चेतावनी जारी नहीं की गई है.

दक्षिण अंडमान सागर में बने नए सिस्टम को लेकर आईएमडी ने क्या कहा?

आईएमडी के सुबह के बुलेटिन के मुताबिक दक्षिण अंडमान सागर और आसपास के क्षेत्र में ऊपरी हवा के चक्रवाती परिसंचरण के कारण गुरुवार सुबह 5:30 बजे कम दबाव का क्षेत्र बना. अनुमान है कि यह सिस्टम अगले 24 घंटों में पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ेगा.

इसके बाद इसके दक्षिण अंडमान सागर और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के आसपास अधिक स्पष्ट कम दबाव के क्षेत्र में बदलने की संभावना है. मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार अगले 24 घंटों में यह सिस्टम दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी के ऊपर डिप्रेशन का रूप ले सकता है.

अगर यह अनुमान सही साबित होता है तो समुद्र के ऊपर मौसमी गतिविधियां और तेज हो सकती हैं. ऐसे में सिस्टम की दिशा और उसकी तीव्रता पर नजर रखना जरूरी होगा.

चक्रवात अर्नब अब किस स्थिति में है?

आईएमडी के अनुसार चक्रवात अर्नब अब काफी कमजोर हो गया है. इसके अवशेष दक्षिण छत्तीसगढ़ और उससे सटे ओडिशा के आसपास डिप्रेशन के रूप में मौजूद हैं. रायपुर और संबलपुर में तैनात डॉप्लर मौसम रडार इस सिस्टम की गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं.

डिप्रेशन की स्थिति में पहुंचने के बाद भी किसी मौसम सिस्टम का प्रभाव उसके स्थान और आगे की गति पर निर्भर करता है. इसलिए इसके कमजोर पड़ने के बावजूद मौसम विभाग इसकी निगरानी जारी रखे हुए है.

नए सिस्टम के संभावित प्रभाव को लेकर ओडिशा के मौसम केंद्र के वैज्ञानिकों की नजर समुद्र की परिस्थितियों और हवा की दिशा पर है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक ओडिशा के लिए इस सिस्टम के संबंध में कोई अलग चेतावनी जारी नहीं की गई है.

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि नया सिस्टम आगे चलकर कितना मजबूत होगा और उसका असर किन क्षेत्रों तक पहुंचेगा. इसके लिए कम दबाव के क्षेत्र की दिशा और तीव्रता में होने वाले बदलाव अहम होंगे. मौसम विभाग के अगले बुलेटिन से इस बारे में अधिक स्पष्ट जानकारी मिल सकती है.

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