'UCC समझना है तो छठ पूजा देखिए', क्यों बोले सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज संजय करोल, बिहार को बताया सेक्युलरिज्म का उदाहरण

'UCC समझना है तो छठ पूजा देखिए', क्यों बोले सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज संजय करोल, बिहार को बताया सेक्युलरिज्म का उदाहरण

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस संजय करोल ने UCC यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड को समय की जरूरत बताया है. दिल्ली में एक कानूनी संवाद कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 44 और धर्मनिरपेक्षता को जमीन पर समझना है तो बिहार की छठ पूजा देखनी चाहिए. उनके मुताबिक इस पर्व में अलग-अलग समुदायों के लोग बिना भेदभाव के एक साथ पूजा करते हैं. जस्टिस करोल ने अपने पटना हाई कोर्ट के कार्यकाल का अनुभव भी शेयर किया. उन्होंने UCC पर बातचीत और चर्चा के जरिए समाधान निकालने पर जोर दिया.

यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी UCC पर देश में जब भी चर्चा होती है तो बात कानून से लेकर धर्म और परंपराओं तक पहुंच जाती है. अब सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस संजय करोल ने इस बहस को समझाने के लिए बिहार की छठ पूजा का उदाहरण दिया है. उन्होंने कहा कि अगर किसी को संविधान के अनुच्छेद 44 की भावना और धर्मनिरपेक्षता को जमीन पर देखना है तो उसे बिहार जाकर छठ पूजा देखनी चाहिए. जस्टिस करोल ने UCC को समय की जरूरत भी बताया. उनके इस बयान ने छठ पूजा से पहले एक नई चर्चा छेड़ दी है. आखिर एक धार्मिक पर्व को उन्होंने समान नागरिक संहिता और सेक्युलरिज्म से कैसे जोड़ा? इसके पीछे बिहार में उनके कामकाज के दौरान का अनुभव अहम है.

न्यूज एजेंसी ANI के अनुसार जस्टिस संजय करोल ने बुधवार को दिल्ली में भारत कलेक्टिव फाउंडेशन की ओर से आयोजित नेशनल लीगल डायलॉग में यह बात कही. कार्यक्रम संविधान के अनुच्छेद 44 पर केंद्रित था. अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि भारत की संवैधानिक भावना को केवल किताबों और कानूनी बहसों से नहीं समझा जा सकता. इसे समाज के बीच जाकर भी देखना चाहिए. उन्होंने पटना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के तौर पर बिहार में बिताए समय का जिक्र किया. उनके मुताबिक छठ पूजा ऐसा अवसर है जहां अलग-अलग समुदायों के लोग एक साथ आते हैं. घाटों पर पूजा और सामाजिक मेलजोल के जरिए वे एक-दूसरे के साथ खड़े नजर आते हैं. उनके लिए यह धर्मनिरपेक्षता की भावना को समझने का व्यावहारिक उदाहरण है.

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