जंतर-मंतर प्रदर्शन मामला: CJP नेता सौरभ दास ने पुलिस और मंत्री कपिल मिश्रा पर लगाए गंभीर आरोप
Raisina News Desk- सितंबर 03, 2026 06:56 PM IST

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान दलित युवक संजय पर हुए हमले को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के सह-संयोजक नेता सौरभ दास ने सोशल मीडिया पर लंबा बयान जारी करते हुए पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में गंभीर चोट लगने के बावजूद पुलिस ने आरोपियों पर सख्त धाराएं नहीं लगाईं, जिससे उनकी तत्काल गिरफ्तारी नहीं हो सकी.
सौरभ दास ने अपने ट्वीट में कहा कि हमले में घायल संजय के सिर पर इतनी गंभीर चोट आई कि उनकी खोपड़ी तक फट गई. उनके मुताबिक चोट की गंभीरता को देखते हुए एफआईआर में हत्या के प्रयास से जुड़ी धारा 307 लगाए जाने की जरूरत थी. उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने इस धारा को जोड़ने से इनकार कर दिया.
उनका कहना है कि धारा 307 संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में आती है और इसके लगते ही आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी संभव होती. सौरभ दास ने दावा किया कि गिरफ्तारी से बचाने के लिए ही यह धारा नहीं जोड़ी गई.
CJP नेता ने कहा कि बाद में उन्होंने कम से कम गंभीर चोट से जुड़ी धारा 326 लगाने की मांग की, लेकिन इसे भी स्वीकार नहीं किया गया. ट्वीट में उन्होंने डीसीपी सचिन शर्मा और एसीपी अजय शर्मा का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि अधिकारियों ने हमारे मुहं पर कहा कि “जाओ कोर्ट से आदेश ले आओ”
Allow me to tell you what exactly happened after BJP-protected goon Swatantra Bhardwaj’s attack on Dalit man Sanjay at our Jantar Mantar protest:
– Sanjay ji’s skull was cracked open. The wound dimensions were of such great size that it obviously warranted an Attempt to Murder…
— Saurav Das (@SauravDassss) September 3, 2026
सौरभ दास ने दावा किया कि अब तक विशेषज्ञ डॉक्टरों की मेडिकल राय उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गई है. उन्होंने यह भी कहा कि मुख्य आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज के साथ मौजूद अन्य लोगों की पहचान भी अभी तक नहीं हो सकी है.
ट्वीट में आरोप लगाया गया कि हमले के बाद कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर वीडियो और रील बनाईं और संजय की नाबालिग बेटी निशु को भी खुलेआम धमकियां दीं. इसके बावजूद उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई.
सौरभ दास ने अपने बयान में दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा का भी जिक्र किया. उन्होंने आरोप लगाया कि स्वतंत्र भारद्वाज खुले तौर पर यह दावा कर रहा है कि मंत्री की ओर से पुलिस पर दबाव बनाया गया ताकि उसे थाने से छोड़ा जाए और उसके खिलाफ कड़ी धाराएं न लगाई जाएं.
CJP नेता ने सवाल उठाया कि यदि किसी मंत्री ने जांच प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया है तो उनकी भूमिका की भी जांच होनी चाहिए. उन्होंने पूछा कि क्या ऐसे आरोपों के बाद मंत्री को पद पर बने रहना चाहिए और क्या भाजपा नेतृत्व इस मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करेगा.