86 साल पुराने दिल्ली रेस क्लब पर चला बुलडोजर, केंद्र को कब्जा मिलने के बाद पुरानी इमारतें ध्वस्त
Raisina News Desk- अगस्त 28, 2026 10:00 AM IST

नई दिल्ली:
दिल्ली रेस क्लब परिसर में बुलडोजर एक्शन शुरू हो गया है. यह कार्रवाई केंद्र सरकार द्वारा दिल्ली रेस क्लब के 53 एकड़ परिसर का कब्जा लेने के कुछ ही देर बाद शुरू हुई. मंगलवार को पटियाला हाउस कोर्ट ने क्लब की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें संपदा अधिकारी द्वारा सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जा करने वालों की बेदखली) अधिनियम के तहत 11 अगस्त को जारी बेदखली के आदेश पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की गई थी. इसके बाद, केंद्र सरकार ने लुटियंस दिल्ली में लोक कल्याण मार्ग स्थित इस परिसर का कब्जा ले लिया.
क्लब से जुड़े एक सूत्र ने बताया, ‘‘क्लब और रेसिंग से जुड़े किसी भी शख्स के लिए यह बहुत परेशान करने वाला दृश्य था.”
क्लब के अधिकारी ने कहा, “हमारे पास 250 से ज्यादा घोड़े थे. इनमें से करीब 200 घोड़ों को उनके मालिकों ने वापस ले लिया है, जबकि करीब 50 घोड़े अभी भी क्लब में हैं.” उन्होंने कहा, ‘‘हमें सब कुछ ठीक करने के लिए 14 सितंबर तक का वक्त दिया गया है. हम अगले एक-दो हफ्तों में बाकी घोड़ों को उनके मालिकों के पास भेजने की योजना बना रहे हैं.”
नए सिरे से बना था रेस कोर्स…
1940 के दशक में नए सिरे से बनाए गए क्लब के अस्तबलों को इस तरह से डिजाइन किया गया था कि घोड़े दिल्ली की भीषण गर्मी से बचे रहें. अधिकारी ने कहा, “इस जगह को बहुत सावधानी से बनाया गया था, जिससे घोड़ों को गर्मी से बचाया जा सके और अस्तबल में हवा-पानी का अच्छा इंतजाम रहे.”
अपनी नस्ल और रेसिंग रिकॉर्ड के आधार पर 3 लाख से 50 लाख रुपये तक की कीमत वाले ये ‘थोरब्रेड’ घोड़े देश के सबसे बेहतरीन और महंगे रेस के घोड़ों में से हैं.
सूत्रों ने ‘पीटीआई’ को बताया कि कुछ दिनों में, रेसकोर्स से घोड़ों को ले जाने वाली गाड़ी (हॉर्स फ़्लोट) निकलती है और देश भर के रेसिंग सेंटर पर बने नए परिसरों में कीमती रेस-घोड़ों को पहुंचाती है.
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कानून का दखल कैसे हुआ?
कानूनी विवाद मार्च में शुरू हुआ, जब भूमि एवं विकास कार्यालय ने क्लब को एक नोटिस जारी करके 15 दिनों के अंदर सरकारी जमीन खाली करने का निर्देश दिया. नोटिस में कहा गया था कि इस जमीन की जरूरत सार्वजनिक कार्यों के लिए है. क्लब ने दिल्ली हाई कोर्ट में इस आदेश को चुनौती दी.
हाई कोर्ट की बेंच ने 26 मई को उस अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया, जिसने क्लब के खिलाफ कारण बताओ कार्यवाही पर रोक लगा रखी थी, जिससे बेदखली की प्रक्रिया जारी रह सके.
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