कोई टारगेट IAF की पहुंच से बाहर नहीं… ऑपरेशन सिंदूर पर वायुसेना प्रमुख एपी सिंह का बड़ा बयान
Raisina News Desk- अक्टूबर 25, 2026 11:32 AM IST
ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारत ने पाकिस्तान को ऐसा जख्म दिया, जिसे वो कभी भुला नहीं सकता. भारतीय वायुसेना ने अपनी मारक क्षमता का प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तान के खिलाफ सटीक हमले किए थे. रविवार (25 अक्टूबर) को एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने पाकिस्तान को साफ तौर पर चेतावनी देते हुए कहा कि भारतीय वायुसेना (IAF) के पश्चिमी मोर्चे पर 1,200 km चौड़ाई और 200 km गहराई तक किए गए सटीक हमलों ने दिखा दिया कि कोई भी टारगेट उसकी पहुंच से बाहर नहीं है.
एक इंटरव्यू के दौरान एयर चीफ मार्शल ने कहा कि इस ऑपरेशन ने देश के मुख्य जवाब देने वाले और एक स्ट्रेटेजिक रोकने वाले के तौर पर एयर पावर की अहम भूमिका को फिर से साबित किया है.
उन्होंने कहा ‘पश्चिमी मोर्चे पर 1,200 km चौड़ाई और 200 km गहराई तक सटीक हमलों ने साबित कर दिया कि कोई भी टारगेट IAF की पहुंच से बाहर नहीं है. ऑपरेशन सिंदूर IAF के कैपेबिलिटी-सेंट्रिक अप्रोच का वैलिडेशन था’.
चार दिन के ऑपरेशन की देखरेख करने वाले एयर स्टाफ चीफ ने कहा कि ऑपरेशन के दौरान देश में बने हथियारों की परफॉर्मेंस पर भी ज़ोर दिया गया. सिंह ने बताया ‘ऑपरेशन सिंदूर ने देश के मुख्य जवाब देने वाले और इसके स्ट्रेटेजिक रोकने वाले के तौर पर एयर पावर की अहम भूमिका को फिर से साबित किया. देश में बने कई हथियारों ने बहुत अच्छा काम किया, और दुश्मन को करारा जवाब दिया’.
उन्होंने आगे कहा ‘एक कैपेबिलिटी-सेंट्रिक फोर्स इसमें स्वाभाविक रूप से बेहतर होती है, क्योंकि यह एक पर निर्भर रहने के बजाय कई टूल्स का इस्तेमाल कर सकती है. इसी फ्लेक्सिबिलिटी ने हमें अपने रिस्पॉन्स को कैलिब्रेट करने और एस्केलेशन पर कंट्रोल रखने में मदद की’.
पिछले साल मई में पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाकों में भारतीय सेना ने आतंकी ढांचे पर सटीक हमले किए गए. यह 1971 के बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के बाद भारत की सबसे बड़ी सीमा पार सैन्य कार्रवाई थी,जिसने सीमा पार आतंकियों की कमर तोड़कर रख दी है.
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा ‘ऑपरेशन सिंदूर ने साबित कर दिया कि हमने जो रास्ता चुना है, वह सही है. हम इसे और भी ज़्यादा पक्के इरादे के साथ जारी रखेंगे, ताकि अगर देश हमें फिर बुलाए, तो IAF देश की शर्तों पर और तेज़ी से और सही तरीके से और ज़्यादा मज़बूती से जवाब दे सके’.
उन्होंने यह भी बताया कि स्वदेशी रूप से विकसित कुछ हथियार प्रणालियों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया और दुश्मन के इलाके में गहराई तक जाकर भारी तबाही मचाई. साथ ही, पूरे ऑपरेशन के दौरान भारतीय वायु सेना ने जीरो कोलैटरल डैमेज (आम नागरिकों या संपत्ति को कोई नुकसान न पहुंचाने) के अपने वादे को भी बखूबी निभाया. उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर, सबसे बढ़कर, भारतीय वायु सेना की उस ‘क्षमता-केंद्रित’ (capability-centric) रणनीति की पुष्टि करता है, जिसे हम अपनाते आ रहे हैं. अब हम केवल अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स के बारे में सोचने के बजाय, ‘क्षमता’ (capability) के नजरिए से सोचते हैं. इसमें हर विमान, सेंसर, हथियार और नेटवर्क को इस तरह से जोड़ा (integrate) जाता है कि उनका संयुक्त प्रभाव, उनके अलग-अलग हिस्सों के योग से कहीं अधिक शक्तिशाली हो जाता है’.
उन्होंने कहा ‘इस ऑपरेशन ने हमारी इस सोच को वास्तविक युद्ध-परिस्थितियों में परखा और यह पूरी तरह सफल रही. इसने देश के ‘प्राइमरी रिस्पॉन्डर’ (सबसे पहले कार्रवाई करने वाले) और ‘स्ट्रैटेजिक डेटरेंट’ (दुश्मन को रोकने वाली रणनीतिक ताकत) के रूप में वायु शक्ति की निर्णायक भूमिका को फिर से साबित किया. साथ ही, इसने गति, सटीकता, एकीकरण (integration) और परिस्थितियों के अनुसार ढलने की क्षमता (adaptability) के निरंतर महत्व को और मजबूत किया’.
एयर चीफ मार्शल ने कहा कि भारत की अपनी विकसित नेटवर्क-आधारित एयर डिफेंस प्रणाली ने पाकिस्तानी सेना द्वारा भेजे गए बड़ी संख्या में ड्रोन्स और दूर से वार करने वाले हथियारों को नाकाम कर दिया, जिससे देश पूरे आत्मविश्वास के साथ कार्रवाई कर सका. उन्होंने कहा ‘हमले और बचाव की क्षमताओं ने एक-दूसरे को मजबूत किया; एक ऐसी सेना, जो अपनी क्षमताओं पर केंद्रित हो, उसका मकसद यही होता है’
एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने संयुक्त और मल्टी-डोमेन (कई क्षेत्रों को जोड़ने वाली) कार्यप्रणाली की अहमियत भी साबित की. उन्होंने बताया कि वायु, थल, समुद्र, अंतरिक्ष, साइबर और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक क्षेत्रों को एक साथ लाने से फैसले तेजी से लिए जा सके और ऑपरेशन का असर कहीं ज्यादा प्रभावी रहा.
हालांकि, IAF प्रमुख ने कहा कि अब वायु सेना को अपनी युद्धक क्षमता, ISR (खुफिया जानकारी, निगरानी और टोह लेने की क्षमता), इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, काउंटर-UAS (ड्रोन-रोधी) क्षमता, मजबूत नेटवर्क और AI-आधारित निर्णय लेने में मदद करने वाली प्रणालियों को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए. इसके साथ ही मजबूत लॉजिस्टिक्स, रखरखाव, बुनियादी ढांचे और सबसे बढ़कर, स्वदेशी उत्पादन के जरिए लंबे समय तक गहन युद्ध अभियानों को जारी रखने की क्षमता विकसित करनी होगी. उन्होंने बताया कि इन सभी मोर्चों पर पहले से ही काम चल रहा है.