OYO Success Story: 19 साल का लड़का, 18 हजार करोड़ की नेटवर्थ; बिना एक भी होटल खरीदे ऐसे खड़ा किया साम्राज्य
Raisina News Desk- सितंबर 21, 2026 03:23 PM IST
एक 18 साल का लड़का. जेब में फूटी कौड़ी नहीं, न कोई बड़ा खानदानी बिजनेस, न कोई गॉडफादर और न ही करोड़ों का बैंक बैलेंस. लेकिन महज 10 साल के भीतर वो लड़का एक ऐसी कंपनी खड़ी कर देता है, जिसकी नेटवर्थ के आगे देश-दुनिया के बड़े-बड़े रईस पानी भरने लगते हैं. आज की बात भारत के सबसे युवा अरबपति रितेश अग्रवाल और उनकी जादुई कंपनी ओयो (OYO) की.
आज ‘सक्सेस स्टोरी’ के इस खास एपिसोड में हम आपको बताएंगे कि कैसे ओड़िशा के एक छोटे से गांव से निकले इस लड़के ने पूरी दुनिया के सामने साबित कर दिया कि “गरीबी कभी सोच को छोटा नहीं कर सकती.”
डिक्शनरी से मिला पहला सबक
कहानी शुरू होती है साल 1993 से. ओडिशा के एक बेहद छोटे और पिछड़े गांव ‘बिसम कटक’ में रितेश का जन्म हुआ. पिता किराना दुकान चलाते थे. घर का खर्च बमुश्किल खिंच पाता था.
जब रितेश चौथी क्लास में थे, तो स्कूल में पहली बार कंप्यूटर आया. स्कूल का नियम था कि छठी क्लास से छोटे बच्चे कंप्यूटर छू भी नहीं सकते. लेकिन रितेश के भीतर एक अलग ही छटपटाहट थी. वो टीचर्स के पास जाते और कहते, “मैम, प्लीज मुझे कंप्यूटर सिखा दीजिए, बदले में मैं आपके छोटे-मोटे काम कर दूंगा.” बस, यहीं से रितेश को कंप्यूटर का चस्का लग गया और उन्होंने खेल-खेल में कोडिंग सीख ली.
इसी दौरान उन्होंने अपनी बड़ी बहन की डिक्शनरी में एक शब्द पढ़ा ‘एंटरप्रेन्योर’. मतलब लिखा था. “वो इंसान जो समाज की समस्याओं को पहचाने और उसके इर्द-गिर्द बिजनेस खड़ा करे.” बस, रितेश के बाल-मन में यह बात पत्थर की लकीर बन गई. जब क्लास में बाकी बच्चे डॉक्टर-इंजीनियर बनने का सपना देख रहे थे, तब यह छोटा सा लड़का सीना ठोककर कहता था, “मैं बड़ा होकर एंटरप्रेन्योर बनूंगा.”
कोटा का ‘दमघोंटू’ माहौल
रितेश के घरवाले चाहते थे कि वो इंजीनियरिंग करें, इसलिए उन्हें राजस्थान के कोटा भेज दिया गया. लेकिन कोटा पहुंचते ही रितेश का दम घुटने लगा. वहां बच्चों को दिन-रात सिर्फ किताबों में सिर खपाते देख रितेश समझ गए कि यह भेड़चाल उनके बस की बात नहीं है.
वो घरवालों को बिना बताए गुपचुप दिल्ली भागने लगे. उन्हें ट्रैवलिंग यानी घूमने का बेहद शौक था. अब चूंकि जेब तंग थी, तो वो होटल्स को ईमेल लिखते थे, “क्या आप मुझे अपने होटल में मुफ्त में रुकने देंगे? मैं आगे चलकर होटल इंडस्ट्री की बहुत बड़ी समस्या हल करने वाला हूं.”
हंसने वाले बहुत थे, लेकिन कुछ लोगों को इस बच्चे की बातों में दम लगा. इसी जुगाड़ से रितेश ने मात्र 17-18 साल की उम्र में करीब 100 जगह घूम डालीं और 200 से ज्यादा होटल के कमरों में वक्त बिताया. यहीं से उनकी पारखी नजरों ने देश के बजट होटलों की सबसे बड़ी बीमारी को पकड़ लिया.
बदबूदार कमरे, उखड़े हुए पर्दे… फिर हुआ OYO का जन्म
रितेश ने देखा कि भारत में सस्ते होटलों की कमी नहीं है, लेकिन वहां का अनुभव बेहद घटिया था. कहीं चादरें गंदी थीं, कहीं वॉशरूम से बदबू आ रही थी, तो कहीं रिसेप्शनिस्ट बिना शर्ट पहने बैठा था. उन्होंने सोचा कि क्यों न एक ऐसी टेक्नोलॉजी और सर्विस बनाई जाए, जो कस्टमर को हर शहर में एक जैसा और बेहतरीन अनुभव दे.
उन्होंने शुरुआत की गुड़गांव के एक घाटे में चल रहे होटल से. रितेश 19 साल की उम्र में उस होटल के मालिक के पास गए और बोले, “यह होटल मुझे चलाने दो. नंबर वन बना दूंगा. मुनाफा हुआ तो आधा-आधा, नुकसान हुआ तो सारा मेरा.”
मालिक मान गया. रितेश ने खुद काउंटर पर बैठकर चादरें बदलीं, बाथरूम में साबुन रखवाए, पर्दे सुधारे और पूरे होटल का हुलिया बदल दिया. फिर क्या था? इंटरनेट पर उस होटल की रेटिंग आसमान छूने लगी और देखते ही देखते घाटे में चल रहा वो होटल 90% बुकिंग के साथ नोट छापने की मशीन बन गया.
जब कॉलेज छोड़ने के मिले ₹50 लाख
इस बीच रितेश ने अमेरिकी बिजनेसमैन पीटर थील की ‘थील फेलोशिप’ के बारे में सुना. इसकी शर्त थी उम्र 20 साल से कम हो और आपको अपना कॉलेज छोड़ना होगा. रितेश हंसकर कहते हैं, “दुनिया में भला इससे अच्छा मौका क्या होगा कि कॉलेज छोड़ने के लिए कोई आपको पैसे दे!”
रितेश ने कॉलेज ड्रॉप कर दिया और वे थील फेलोशिप पाने वाले पहले एशियाई बने. 19 साल के इस लड़के के बैंक खाते में सीधे ₹50 लाख आ चुके थे. अब रितेश के पास पैसा भी था, आइडिया भी था और उड़ने के लिए पूरा आसमान भी.
वो ‘खूनी’ धमकियां और 3 दिन का जादुई फॉर्मूला
ओयो इतनी तेजी से बढ़ने लगा कि पारंपरिक रियल एस्टेट और होटल मालिकों के धंधे चौपट होने लगे. रितेश को जान से मारने की धमकियां तक मिलने लगीं, लेकिन इस लड़के का कलेजा फौलाद का था. वे डरे नहीं.
रितेश ने एक ऐसा सिस्टम बनाया कि जो होटल ऑनबोर्ड होने में पहले 6 से 10 महीने लेता था, वो ओयो की टेक्नोलॉजी की मदद से सिर्फ 3 दिन में रिनोवेट होकर लाइव होने लगा. उन्होंने दिल्ली को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर एक महीने में रिकॉर्ड 130 होटलों को ओयो के बैनर तले ला खड़ा किया. देखते ही देखते साल 2016 तक ओयो भारत की सबसे बड़ी होटल चेन बन गई.
कोरोना काल में शेर जैसा कमबैक
साल 2020 में जब ओयो अपने शिखर पर था, तभी पूरी दुनिया पर कोरोना महामारी का कहर टूटा. लॉकडाउन लग गया, लोगों का घरों से निकलना बंद हो गया और ओयो की कमाई शून्य पर आ गई. बड़ी से बड़ी कंपनियां बंद हो गईं, लेकिन रितेश ने हार नहीं मानी.
उन्होंने अपने होटलों को डॉक्टरों, नर्सों और जरूरतमंदों के लिए बेहद सस्ते दामों पर खोल दिया. सैनिटाइजेशन और ‘नो-टच’ सर्विस की शुरुआत की. ओयो ने इस महासंकट का डटकर मुकाबला किया और जैसे ही कोरोना का बादल छंटा, ओयो ने एक शेर की तरह बाजार में वापसी की.
आज OYO फाउंडर रितेश अग्रवाल 32 साल की उम्र में देश के सबसे यंगेस्ट बिलिनियर्स हैं. हाल ही में ‘हुरुन ग्लोबल रिच लिस्ट 2026’ के मुताबिक, उनकी नेटवर्थ 18,402 करोड़ रुपए है.