वैज्ञानिकों ने सुलझाया 7 करोड़ साल का रहस्य, कैसे धरती से खत्म हुए डायनासोर, एसिड रेन नहीं उतरा था एलियन खलनायक
Raisina News Desk- सितंबर 21, 2026 04:10 PM IST
Dinosaur End on Earth: हमारी धरती हमेशा से ऐसी नहीं थी, जैसी हम देख रहे हैं और न ही हमेशा से यहां मानवता हुआ करती थी. पहले यहां हमसे कई गुना बड़े-बड़े जीव रहते थे और इस धरती पर आज भी उनके अवशेष मिलते हैं. वैज्ञानिकों के आगे ये सवाल हमेशा से रहा है कि आखिर फिर सब कुछ बदला कैसे? इसका जवाब करीब 6.6 करोड़ साल पहले पृथ्वी पर घटी एक ऐसी घटना में छिपा है, जिसने पूरी दुनिया की तस्वीर बदल दी. बताते हैं कि अंतरिक्ष से आया एक विशाल पत्थर धरती से जा टकराया और धरती पर उस वक्त रहने वाले डायनासोर समेत 75 प्रतिशत प्रजातियों को हमेशा के लिए खत्म कर दिया.
ये थ्योरी तो सबने मान ली लेकिन अब भी वैज्ञानिक अब उस रहस्यमयी पत्थर की पहचान कर रहे हैं, जिसमें धरती को वीरान कर देने की ताकत थी. ये कितना बड़ा एस्टेरॉयड होगा, जिसने एक बार में सब कुछ तबाह कर दिया होगा. अब वैज्ञानिकों की नई रिसर्च बताती है कि वह कोई आम उल्कापिंड नहीं था, बल्कि एक बेहद दुर्लभ किस्म का एस्टेरॉयड था. रिसर्च बताती है कि यह टकराव मैक्सिको के युकाटन प्रायद्वीप में हुआ. वहां चिक्सुलब नाम का विशाल गड्ढा बना, जो आज जमीन के नीचे दबा हुआ है.
वैज्ञानिकों के मुताबिक वो एस्टेरॉयड लगभग 10 से 15 किलोमीटर चौड़ा था, यानि करीब एक छोटे शहर जितना बड़ा. वो कोई साधारण एस्टेरॉयड नहीं था बल्कि उसकी रफ्तार थी – करीब 64,000 किलोमीटर प्रति घंटा. समान्य तौर पर देखें तो इतनी तेज कि साधारण विमानों को गई गुना पीछे छोड़ दे. उल्कापिंड टकराने के साथ ही वह पूरा वाष्प बन गया. बताया जा रहा है कि इतना भयंकर विस्फोट हुआ कि आसमान में धूल और मलबे का घना बादल छा गया. इसके बाद सूरज की रोशनी महीनों तक धरती तक नहीं पहुंच पाई. इतना ही नहीं तापमान गिर गया, पौधे मरने लगे और फूड चेन टूट गई. इसका नतीजा हुआ कि डायनासोर समेत हजारों प्रजातियों का धरती से सफाया हो गया.
धरती से टकराव में वह पत्थर पूरी तरह से गायब हो गया, इसलिए वैज्ञानिकों को दुनिया भर में बिखरी महीन मिट्टी की परत में छिपे निशान खोजने पड़े. इस परत को केटी क्ले कहा जाता है. पेरिस, ब्रुसेल्स, वियना और ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने इस मिट्टी में निकल आइसोटोप की बेहद सटीक जांच की. नतीजे हैरान करने वाले निकले. वह पत्थर कार्बनैसियस कोंड्राइट फैमिली का था, खासकर सीओ कोंड्राइट या ओरनान्स क्लास का. ये उल्कापिंड धरती पर मिलने वाले कुल उल्कापिंडों का सिर्फ 5 प्रतिशत हिस्सा हैं और सीओ कोंड्राइट तो उनमें भी बहुत दुर्लभ हैं. ये सौर मंडल के सबसे प्राचीन और अछूते पदार्थों में से हैं.
दिलचस्प बात यह है कि इनमें सल्फर की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है. पहले कई वैज्ञानिक मानते थे कि टकराव से निकले सल्फर ने अम्लीय बारिश पैदा की होगी, जिसने विनाश को और तेज किया, लेकिन नई खोज के बाद लगता है कि असली खलनायक वह महीन मलबा था जो वायुमंडल में फैल गया. उसी ने सूरज की रोशनी रोक दी और लंबी सर्दी जैसी स्थिति पैदा कर दी. यह दुर्लभ पत्थर शायद सौर मंडल के बाहरी इलाके या बृहस्पति के पास एस्टेरॉयड बेल्ट से आया होगा. वैज्ञानिक फिलिप क्लेज कहते हैं- ‘इतने दुर्लभ और दूर के पत्थर से टकराना डायनासोर के लिए सच में बदकिस्मती वाली बात थी.’ यह खोज सिर्फ डायनासोर के अंत की कहानी नहीं सुनाती. यह हमें याद दिलाती है कि अंतरिक्ष कितना अनिश्चित और खतरनाक हो सकता है.