इंडियन नेवी को मिला तीसरा एंटी-सबमरीन युद्धपोत ‘मंगरोल’, बनाने में 80% से ज्यादा स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल

नई दिल्ली:

भारतीय नौसेना को पनडुब्बियों का पता लगाने और तटीय इलाकों की निगरानी के लिए एक नया युद्धपोत मिला है. कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड  कोच्चि ने एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW SWC) ‘मंगरोल’ को नौसेना को सौंप दिया. ‘मंगरोल’ इस कैटेगरी का CSL की ओर से बनाया गया तीसरा पोत है. इसमें 80 फीसदी से ज्यादा सामग्री स्वदेशी है. इसे तटीय इलाकों में पनडुब्बियों की निगरानी और उनसे निपटने के लिए तैयार किया गया है.

‘मंगरोल’ का इस्तेमाल समुद्र के अंदर निगरानी और पनडुब्बी रोधी अभियानों में किया जा सकेगा. यह तटीय इलाकों में कम तीव्रता वाले समुद्री अभियानों में भी काम कर सकता है.

इसके अलावा यह माइन वॉरफेयर यानी समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों से जुड़े अभियानों के लिए भी सक्षम है. पोत में आधुनिक रडार और सोनार लगाए गए हैं. सोनार की मदद से समुद्र के अंदर मौजूद पनडुब्बियों और दूसरी वस्तुओं का पता लगाने में मदद मिलती है. ‘मंगरोल’ में आधुनिक टॉरपीडो और पनडुब्बी रोधी रॉकेट भी लगाए गए हैं. इसे वॉटरजेट तकनीक से चलाया जाता है. इससे पोत को तटीय और उथले पानी वाले इलाकों में बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकता है.

तटीय शहर के नाम पर युद्धपोत 

इस युद्धपोत का नाम गुजरात के जूनागढ़ ज़िले में स्थित मंगरोल शहर और छोटे बंदरगाह के नाम पर रखा गया है. मंगरोल समुद्री मछली कारोबार और मछली पकड़ने के लिए एक अहम बंदरगाह है. इस नाम का भारतीय नौसेना के इतिहास से भी संबंध है. इससे पहले आईएनएस मंगरोल नाम का एक नौसैनिक माइनस्वीपर भारतीय नौसेना में शामिल था. यह 2004 तक सेवा में रहा. नए पोत का नाम ‘मंगरोल’ रखकर नौसेना ने पुराने युद्धपोत की विरासत को भी आगे बढ़ाया है.

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आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक और कदम

‘मंगरोल’ की डिलीवरी भारतीय नौसेना के स्वदेशी जहाज निर्माण अभियान में एक और महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है. नौसेना के मुताबिक, पोत में 80 फीसदी से ज्यादा स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल देश के रक्षा निर्माण क्षेत्र की बढ़ती क्षमता को दिखाता है.

यह पोत ‘आत्मनिर्भर भारत’ की नीति के तहत देश में रक्षा उपकरण और युद्धपोत बनाने की दिशा में हो रही प्रगति का भी उदाहरण है. नौसेना के लिए ऐसे पोत तटीय सुरक्षा मजबूत करने और समुद्र के अंदर संभावित पनडुब्बी गतिविधियों पर नजर रखने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.

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