तरुण तेजपाल कैसे पहुंच गए जेल, वो बातें जो लोअर कोर्ट ने इग्नोर की, लेकिन हाईकोर्ट ने माना पुख्ता सबूत

वर्ष 2013 के बहुचर्चित यौन उत्पीड़न मामले में तहलका पत्रिका के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल को बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने दोषी ठहराते हुए 10 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है. यह मामला नवंबर 2013 का है, जब गोवा के एक पांच सितारा होटल में आयोजित ‘थिंक फेस्ट’ कार्यक्रम के दौरान तरुण तेजपाल पर अपनी जूनियर महिला सहकर्मी का लिफ्ट के भीतर यौन उत्पीड़न करने के गंभीर आरोप लगे थे.

पीड़िता की शिकायत पर गोवा पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर 30 नवंबर 2013 को तेजपाल को गिरफ्तार किया था. करीब सात महीने जेल में बिताने के बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी. लंबी सुनवाई के बाद मई 2021 में गोवा की मापुसा सत्र (निचली) अदालत ने तेजपाल को संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपों से बरी कर दिया था, लेकिन गोवा सरकार ने इस फैसले को तुरंत हाईकोर्ट में चुनौती दी.

पीड़िता के व्यवहार को ही माना गलत

निचली अदालत ने तरुण तेजपाल को बरी करते हुए पीड़िता के घटना के बाद के व्यवहार और उसके द्वारा भेजे गए सामान्य संदेशों को आधार बनाया था. ट्रायल कोर्ट का मानना था कि पीड़िता ने किसी यौन उत्पीड़न की शिकार महिला की तरह ‘सामान्य’ व्यवहार या आघात प्रदर्शित नहीं किया. हालांकि, हाईकोर्ट में राज्य सरकार और अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि निचली अदालत ने एक गंभीर आपराधिक गलती की, जहां आरोपी के कृत्य की जांच करने के बजाय पीड़िता के चरित्र और उसके व्यवहार को ही कटघरे में खड़ा कर दिया गया. सॉलिसिटर जनरल ने पीठ के सामने स्पष्ट किया कि कानून में कहीं भी यह निर्धारित नहीं है कि यौन अपराध की पीड़िता को घटना के बाद किसी विशिष्ट या पारंपरिक तरीके से ही प्रतिक्रिया देनी चाहिए.

नो का मतलब ही होता है इन्कार

बॉम्बे हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने निचली अदालत के उन निष्कर्षों को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिन्हें लोअर कोर्ट ने अनदेखा कर दिया था. हाईकोर्ट ने घटना के तुरंत बाद तरुण तेजपाल द्वारा पीड़िता को भेजे गए उस लिखित माफीनामे वाले ईमेल को बेहद अहम और पुख्ता सबूत माना, जिसमें तेजपाल ने स्वयं अपनी ‘गलती’ स्वीकार की थी. इसके अलावा अदालत ने संस्थान में तेजपाल के वरिष्ठ पद, पीड़िता पर उनके प्रभाव और विश्वास के दुरुपयोग के कानूनी पहलुओं को प्राथमिकता दी. हाईकोर्ट ने माना कि जब महिला स्पष्ट रूप से इनकार (‘नो’) करती है, तो उसका मतलब इन्कार ही होता है, और उत्तरवर्ती सामान्य व्यवहार या मैसेज मुख्य अपराध की गंभीरता को कम नहीं करते.

तरुण तेजपाल को कितनी सजा मिली

इन तमाम पुख्ता इलेक्ट्रॉनिक और मौखिक साक्ष्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने निचली अदालत के 2021 के बरी करने वाले आदेश को रद्द करते हुए तरुण तेजपाल को बलात्कार और यौन उत्पीड़न (आईपीसी की धारा 376(2)(f), 376(2)(k), 354A और 354B) का दोषी पाया. अदालत ने 62 वर्षीय तेजपाल को 10 साल की बामशक्कत कैद और 10 लाख रुपये से अधिक के जुर्माने की सजा सुनाई. इसके साथ ही हाईकोर्ट ने उन्हें आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया, जिसके बाद एक दशक से चल रही इस कानूनी लड़ाई में निचली अदालत का फैसला पलट गया और तेजपाल को आखिरकार जेल की सलाखों के पीछे जाना पड़ा.

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