धार भोजशाला विवाद: जुमे की नमाज़ के लिए ज़मीन आवंटन पर SC सख्त, CJI ने कहा-सरकार स्पष्ट ब्यौरा दे

मध्यप्रदेश के धार में मौजूद भोजशाला में जुमे की नमाज़ के लिए जगह आवंटन के मुद्दे पर बुधवार को भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष ने कहा-भोजशाला के पास ही खाली जगह मौजूद है, लेकिन प्रशासन नमाज़ियों को 1.3 किलोमीटर दूर या शराब भट्टी (brewery) के पास की जगह का विकल्प दे रहा है, जो उन्हें स्वीकार नहीं है. जिस पर चीफ जस्टिस सूर्य कांत की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा कि वे मुस्लिम पक्ष को उचित और स्पष्ट वैकल्पिक जगह का ब्योरा क्यों नहीं दे देते? तब तुषार मेहता ने साफ किया कि अब प्रशासन ने नई जगह तय की है और दूर वाली बात सही नहीं है. मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट अब इस याचिका पर कल, यानी गुरुवार को फिर से विस्तृत सुनवाई करेगा. 

भोजशाला के पास ही है खाली प्लॉट: हुज़ैफा अहमदी

सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्ष की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हुज़ैफा अहमदी ने दलील दी कि भोजशाला स्थल के पास स्थित दरगाह के सामने काफी ज़मीन खाली पड़ी है, जिसे शुक्रवार की नमाज़ के लिए अस्थाई तौर पर आवंटित किया जा सकता है.

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और स्थानीय प्रशासन उनके मुवक्किलों को परेशान कर रहा है और कोर्ट के पिछले आदेशों का ठीक से पालन नहीं किया जा रहा. अहमदी ने कहा कि कलेक्टर द्वारा जो जगह बताई जा रही है, वह 1.3 किलोमीटर दूर है और दूसरी सुझाई गई जगह एक शराब भट्टी का हिस्सा है.

उन्होंने कोर्ट में स्पष्ट कहा कि किसी एक समुदाय के दबाव में आकर ऐसा नहीं किया जाना चाहिए और पास की खाली ज़मीन ही दी जानी चाहिए.

नई जगह का विकल्प मौजूद है: सॉलिसिटर जनरल

इसके बाद मुस्लिम पक्ष के दावों को खारिज करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता के आरोप पूरी तरह सही नहीं हैं. उन्होंने पीठ को जानकारी दी कि स्थानीय प्रशासन और संबंधित पक्षों के बीच इस मुद्दे को सुलझाने के लिए फिर से बैठक हुई थी. सरकार के पास नमाज़ के लिए एक और उपयुक्त जगह का विकल्प मौजूद है. हालांकि, जब अहमदी ने उस नई जगह को भी काफी दूर बताया, तब CJI सूर्य कांत ने सरकार को निर्देश दिया कि वे पारदर्शी तरीके से वैकल्पिक जगह की पूरी डिटेल मुस्लिम पक्षकारों को सौंपें, ताकि विवाद का व्यावहारिक समाधान निकल सके.
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एएसआई सर्वे और सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश

बता दें  कि सुप्रीम कोर्ट ने 01 अप्रैल 2024 को अपने अंतरिम आदेश में इंदौर हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था, जिसमें भोजशाला परिसर का वैज्ञानिक सर्वे (Scientific Survey) कराने का निर्देश दिया गया था. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया था कि एएसआई (ASI) सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट के अगले आदेश तक परिसर के धार्मिक स्वरूप में कोई बदलाव या तोड़फोड़ नहीं की जाएगी. इसी सर्वे और सुरक्षा इंतजामों के बीच अब शुक्रवार की नमाज़ के स्थान को लेकर कानूनी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट पहुंची है. फिलहाल सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को इस बात पर अहम सुनवाई करेगा कि शुक्रवार की नमाज़ के लिए भोजशाला के पास कौन सी वैकल्पिक जगह सबसे उपयुक्त होगी. 
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