मदरसों पर अखिलेश सरकार में आया वो बिल क्या था, जिसे योगी सरकार ने कर दिया खत्म?
Raisina News Desk- अगस्त 07, 2026 05:13 AM IST

नई दिल्ली:
उत्तर प्रदेश में मदरसों को लेकर एक बार फिर सियासत गरमा गई है. योगी सरकार ने आधिकारिक रूप से मदरसों से जुड़े उस बिल को वापस ले लिया है, जिसे 2016 में अखिलेश यादव की सरकार में पास किया गया था. यह काफी विवादित बिल था. इस कारण यह कभी कानून बन ही नहीं सका. राज्यपाल ने इसे राष्ट्रपति के पास भेज दिया था.
अखिलेश यादव के दौर में बने इस बिल को वापस लेने पर योगी कैबिनेट ने पिछले साल फैसला लिया था. अब इसे मॉनसून सत्र के दौरान विधानसभा और विधान परिषद दोनों से ही वापस ले लिया गया है.
इस बिल को वापस लिए जाने पर योगी सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि उनके जमाने में जो चीजें थीं, जैसे- अयोग्य लोगों को पोस्टिंग देना और बिना वजह पैसे बांटना, उन्हें सरकार ने बदल दिया है. सरकार एक नई व्यवस्था ला रही है.
उत्तर प्रदेश मदरसा (पेमेंट ऑफ सैलरीज टू टीचर्स एंड अदर एम्प्लॉयी) बिल को अगस्त 2016 में पास किया गया था. उस समय यूपी में समाजवादी पार्टी की सरकार थी और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे.
यह बिल मदरसा में पढ़ाने वाले शिक्षकों को पुलिस और प्रशासनिक कार्रवाई से बचाता था. दो चीजें थीं जो इस बिल को विवादित बनाती थीं:-
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अगस्त 2016: 29 अगस्त को तत्कालीन अखिलेश सरकार ने विधानसभा में इस बिल को पास किया. अगले दिन 30 अगस्त को इसे विधान परिषद में पास किया गया. 31 अगस्त को इसे तत्कालीन राज्यपाल राम नाईक के पास भेजा गया.
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अगस्त 2016 में दो दिन में इस बिल को विधानसभा और विधान परिषद में पास किया गया. तीसरे दिन राज्यपाल के पास भी भेज दिया गया. लेकिन यह बिल कभी कानून नहीं बन सका.
जब यह बिल राज्यपाल के पास मंजूरी के लिए भेजा गया तो उन्होंने भी इस पर आपत्ति जताई और इसे राष्ट्रपति के पास भेज दिया.
इलाहाबाद हाई कोर्ट में सीनियर एडवोकेट अमरेंद्र नाथ सिंह ने NDTV में एक ब्लॉग में लिखा कि 2016 का वह बिल असल में मदरसे का ऐसा ढांचा तैयार कर रहा था, जो संस्थान के भीतर स्वायत्तता के नाम पर जवाबदेही से मुक्ति चाहता था.
वह लिखते हैं कि ‘ऐसी व्यवस्था जो न्यायिक प्रक्रिया, आपराधिक न्यायशास्त्र और प्रशासनिक व्यवस्था को ही कठघरे में खड़ा कर दे, उसे संवैधानिक स्वीकृति मिलना मुश्किल था.’
अब योगी सरकार ने इस बिल को वापस लेकर इसका चैप्टर हमेशा-हमेशा के लिए बंद कर दिया है. 10 साल तक अटके रहने के बाद यह बिल वापस हो गया.
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