राम मंदिर के मुद्दे ने मानसून सत्र को सूखा क्यों कर दिया?

रणबीर

यूपी में विधानसभा के मानसून सत्र को तीसरे ही दिन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया. पूरे सत्र में अगर कोई मुद्दा छाया रहा तो वो मुद्दा था राम मंदिर के चढ़ावे की चोरी का मुद्दा. बीजेपी और समाजवादी पार्टी के विधायकों ने एक दूसरे पर सदन ना चलने देने का आरोप लगाया. नतीजा ये हुए कि ना सीएम योगी आदित्यनाथ ने सदन में कुछ ख़ास कहा और ना अनुपूरक बजट पर कोई चर्चा हुई. 

विधानसभा सत्र के विवाद ने बता दिया कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में विपक्ष किसी भी हाल में राम मंदिर के मुद्दे को छोड़ने वाला नहीं है. ये पहला मौक़ा है जब विपक्ष बीजेपी को राम मंदिर के मुद्दे पर घेर रही है. बीजेपी को उसी की पिच पर घेरने का मौक़ा पाकर विपक्ष किसी भी हाल में उसे छोड़ना नहीं चाहता. यही वजह है कि सदन के अंदर और विधानसभा परिसर में विपक्षी नेताओं ने जमकर आवाज़ उठाई. 

दरअसल, अयोध्या के राम मंदिर मामले का ख़ुलासा समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के उस सोशल मीडिया पोस्ट से हुआ, जिसमें 7 जून को अखिलेश यादव ने सीधे मंदिर में चंदा/चढ़ावे की चोरी का आरोप लगाया. अखिलेश यादव के दावे के बाद ट्रस्ट और सरकार सक्रिय हुए और ये मामला देश दुनिया तक फ़ैल गया. सपा के सॉफ्ट हिंदुत्व के एजेंडे को धार देने के लिए राम मंदिर बेहद सटीक मामला है. यही वजह है कि सपा ने पुरज़ोर कोशिश कर सरकार को घेरने का काम किया.

मानसून सत्र के हंगामे और चार दिन के सत्र के दो दिन में ख़त्म हो जाने को लेकर सपा और बीजेपी एक दूसरे पर हमलावर हैं. सपा का दावा है कि बीजेपी राम मंदिर के मुद्दे पर चर्चा से भाग रही है वहीं बीजेपी का कहना है कि सपा चर्चा से बचने के लिए लगातार सदन के वेल में आकर शोर करती रही. आरोप प्रत्यारोप का स्तर ये था कि सबके अपने तर्क और सबके अपने दावे हैं. इन दावों को लेकर अब दोनों दल जनता के बीच जाने की बात कर रहे हैं. 

विधानसभा सत्र की शुरुआत सोमवार 3 अगस्त को हुई और सदन की कार्यवाही गुरुवार 6 अगस्त तक चलनी थी. पहले दिन शोक संवेदना के बाद सदन की कार्यवाही को स्थगित कर दिया गया. दूसरे दिन हंगामे के बीच 59 हज़ार करोड़ का अनुपूरक बजट पेश किया गया. हंगामा इतना बढ़ा कि सपा के विधायक सचिन यादव को पूरे सत्र के लिए निष्कासित कर दिया गया. सदन की कार्यवाही भी बुधवार तक के लिए स्थगित करनी पड़ी. बुधवार को संभल हिंसा की रिपोर्ट और अनुपूरक बजट पास कराने से लेकर कुछ प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित कराने के बाद सदन की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दूसरे दिन यानी मंगलवार को सदन के अंदर अपनी बात रख ही रहे थे तभी विवाद बढ़ता देख विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही को बुधवार तक के लिए स्थगित कर दिया. नतीजा ये हुआ कि सीएम योगी सदन के अंदर अपनी बात नहीं रख सके. मीडिया से बात करते हुए उन्होंने बताया कि राम मंदिर का मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है. साथ ही अयोध्या पुलिस भी जांच कर रही है. ऐसे में सदन में इस मुद्दे पर चर्चा नहीं हो सकती क्योंकि जांच और कोर्ट की सुनवाई प्रभावित हो सकती है. 

राम मंदिर के मुद्दे को लेकर सीएम योगी ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष राम मंदिर मामले में विशेष अधिकार के साथ सदन में चर्चा के लिए राजी थे लेकिन सपा के रुख़ की वजह से चर्चा नहीं हो सकी. उन्होंने कहा कि राम मंदिर मामले में किसी साधु संत की भूमिका नहीं थी लेकिन विपक्ष ने ज़बरदस्ती भगवा पहनकर साधु संतों को बदनाम किया. सीएम ने कहा कि जिन लोगों की भूमिका पाई गई उन्हें गिरफ्तार कर कार्रवाई की गई है. 

फ़िलहाल राम मंदिर का मुद्दा इस क़दर हावी है कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव शायद ही कोई दिन हो जब इस मुद्दे का ज़िक्र ना करते हों. उनकी पार्टी ने भी सदन के अंदर जो रुख़ अपनाया वो बता रहा है कि सपा इस मामले को जनता के बीच लेकर जाएगी और चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश करेगी. बीजेपी बार बार सपा पर कारसेवकों पर गोली चलवाने की बात कह कर पलटवार कर रही है. इन आरोप प्रत्यारोप के बीच ये तय है कि यूपी में राम मंदिर का मुद्दा फ़िलहाल सबसे बड़ा मुद्दा है और विपक्ष इसे इतनी आसानी से नहीं छोड़ने वाला. देखना होगा जनता किसके दावे पर यक़ीन करती है और किसके दावे को ख़ारिज करती है.

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