आधी रात को आया फोन, भारत से उड़ा डॉक्टरों का विमान; मॉरीशस में ऐसे बची गोलीबारी का शिकार हुई एलॉडी की जान

आधी रात को आया फोन, भारत से उड़ा डॉक्टरों का विमान; मॉरीशस में ऐसे बची गोलीबारी का शिकार हुई एलॉडी की जान

Agency:एजेंसियां

मॉरीशस में गोलीबारी का शिकार हुई 27 साल की एलॉडी थॉमस की जान बचाने के लिए भारत से डॉक्टरों की टीम आधी रात को जुटाई गई. काम से घर लौटते समय एलॉडी को गोली लगी थी. उनकी हालत इतनी गंभीर थी कि उन्हें इलाज के लिए भारत लाना भी जोखिम भरा था. ऐसे में मॉरीशस के स्वास्थ्य मंत्री ने भारतीय उच्चायुक्त को फोन किया. इसके बाद हैदराबाद के अस्पताल से 13 सदस्यीय मेडिकल टीम मॉरीशस पहुंची. भारतीय और स्थानीय डॉक्टरों ने मिलकर जटिल ऑपरेशन किया. सर्जरी सफल रही और अब एलॉडी की हालत में काफी सुधार है.

रात का वक्त था, मॉरीशस में एक 27 साल की युवती जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही थी. काम से घर लौटते समय एलॉडी थॉमस को गोली लग गई थी. गोली उसके कान के पास से शरीर में घुसी और बेहद नाजुक हिस्सों तक पहुंच गई. हालत इतनी गंभीर थी कि इलाज में जरा सी चूक उसे हमेशा के लिए अपंग बना सकती थी. स्थानीय डॉक्टरों के सामने चुनौती बड़ी थी. तभी मदद के लिए आधी रात को भारत का नंबर मिलाया गया. मॉरीशस के स्वास्थ्य मंत्री ने भारतीय उच्चायुक्त को फोन किया. इसके बाद हैदराबाद के अस्पताल से डॉक्टरों की टीम जुटाई गई. अगले ही दिन भारत से डॉक्टरों का विमान मॉरीशस के लिए रवाना हो गया. 13 सदस्यीय इस टीम के सामने एक ही लक्ष्य था. गोलीबारी का शिकार हुई एलॉडी की जान बचानी थी.

यह सिर्फ एक मरीज को दूसरे देश में इलाज दिलाने की कहानी नहीं थी. इस बार डॉक्टर मरीज को भारत लाने के बजाय खुद उसके पास पहुंचे. वजह थी कि उसकी हालत में लंबी हवाई यात्रा का जोखिम उठाना ठीक नहीं था. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार भारतीय और मॉरीशस के डॉक्टरों ने पहले ही आपस में बातचीत शुरू कर दी थी. मरीज की जांच रिपोर्ट से लेकर स्कैन और शरीर की स्थिति तक की जानकारी साझा की गई. ऑपरेशन से पहले ही भारत में बैठे विशेषज्ञ स्थानीय डॉक्टरों को जरूरी सलाह दे रहे थे. 12 अक्टूबर को भारतीय टीम मॉरीशस पहुंची और स्थानीय डॉक्टरों के साथ मिलकर सर्जरी की. ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण था. लेकिन कुछ घंटों की मेहनत के बाद राहत की खबर आई. एलॉडी की जान बच गई और अब वह धीरे-धीरे अपने पैरों पर खड़ी होने की कोशिश कर रही है.

डॉक्टरों के मुताबिक सर्जरी के बाद एलॉडी में न तो कोई न्यूरोलॉजिकल कमी दिखाई दी और न ही संक्रमण के संकेत मिले. फोटो X/@HCI_PortLouis

काम से लौट रही थी एलॉडी तभी लगी गोली

यह घटना 9 अक्टूबर की है. एलॉडी थॉमस पोर्ट लुई के दक्षिण में एक रिहायशी इलाके से वैन में अपने घर लौट रही थीं. इसी दौरान उन्हें गोली लग गई. आरोप है कि गोली एक पुलिस अधिकारी ने चलाई थी. इस घटना के बाद मॉरीशस में भारी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए. सड़कों पर प्रदर्शनकारियों की भीड़ उतर आई. जगह-जगह रास्ते रोके गए और पुलिस की संपत्तियों पर हमले हुए. देश में कई दशकों के सबसे गंभीर तनाव की स्थिति बन गई. प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की. लेकिन प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था संभालने के साथ एलॉडी की जान बचाने की भी बड़ी चुनौती थी.

आधी रात को स्वास्थ्य मंत्री ने भारतीय उच्चायुक्त को किया फोन

10 अक्टूबर की रात मॉरीशस के स्वास्थ्य मंत्री अनिल बच्चू ने पोर्ट लुई में भारत के उच्चायुक्त अनुराग श्रीवास्तव से संपर्क किया. उन्होंने एलॉडी के इलाज के लिए भारत से विशेषज्ञ डॉक्टरों की मदद मांगी. भारतीय अधिकारियों ने तुरंत हैदराबाद स्थित KIMS अस्पताल से संपर्क किया. अस्पताल के डॉक्टरों ने स्थानीय मेडिकल टीम से मरीज की स्थिति पर चर्चा की. जांच के बाद उन्हें लगा कि एलॉडी को इलाज के लिए भारत लाना खतरनाक हो सकता है. इसलिए फैसला हुआ कि विशेषज्ञ डॉक्टरों को ही जल्द से जल्द मॉरीशस भेजा जाए. डॉक्टरों की टीम जुटाने और यात्रा की व्यवस्था करने का काम रातोंरात शुरू हो गया.

13 सदस्यीय टीम ने संभाला मोर्चा

  • 12 अक्टूबर को भारत से 13 सदस्यीय मेडिकल टीम मॉरीशस पहुंची. इसमें पांच डॉक्टर और आठ विशेषज्ञ व तकनीकी कर्मचारी शामिल थे. टीम ने वहां के डॉक्टरों के साथ मिलकर एलॉडी का इलाज शुरू किया. कुछ सदस्य ऑपरेशन के अगले दिन भारत लौट आए. वहीं ऑपरेशन के बाद की देखभाल के लिए कुछ विशेषज्ञ कुछ और दिनों तक मॉरीशस में रुके रहे.
  • भारतीय दल का नेतृत्व कर रहे डॉक्टर राकेश जाला ने बताया कि एलॉडी की सेहत में अब काफी सुधार है. वह कुछ कदम चलने में भी सक्षम हो गई हैं. टीम में शामिल न्यूरोसर्जन डॉक्टर कपिल खंडेलवाल ने बताया कि यह मामला कई वजहों से बेहद जटिल था. गोली किस रास्ते से शरीर में गई थी और किन हिस्सों को नुकसान पहुंचने का खतरा था. यही ऑपरेशन की सबसे बड़ी चुनौती थी.

कान के पास से घुसी थी गोली, जरा सी चूक पड़ सकती थी भारी

  • डॉक्टर खंडेलवाल के मुताबिक गोली कान के पास से शरीर में घुसी थी. इसके बाद वह पैरोटिड ग्रंथि के हिस्से से होते हुए बेहद संवेदनशील संरचनाओं की तरफ बढ़ी थी. ऐसे में ऑपरेशन के दौरान नसों को सुरक्षित रखना सबसे जरूरी था. जरा सी लापरवाही से एलॉडी को हमेशा के लिए कमजोरी या न्यूरोलॉजिकल परेशानी हो सकती थी. उन्होंने बताया, ‘न्यूरोलॉजिकल संरचनाओं को किसी भी तरह का नुकसान नहीं होना चाहिए था. अगर ऐसा होता तो मरीज को हमेशा के लिए कमजोरी हो सकती थी.’
  • ऑपरेशन से पहले भारतीय और मॉरीशस के डॉक्टरों के बीच लगातार बातचीत होती रही. इसके लिए एक व्हाट्सऐप ग्रुप भी बनाया गया था. स्थानीय डॉक्टर मरीज की न्यूरोलॉजिकल स्थिति और जरूरी जांचों की जानकारी साझा करते थे. खंडेलवाल ने बताया, ‘वे मुझे मरीज की हालत के बारे में नियमित जानकारी देते थे. इसमें उसकी न्यूरोलॉजिकल स्थिति और जरूरी शारीरिक संकेतों के साथ स्कैन और खून की जांच के नतीजे भी शामिल थे.’

ऑपरेशन सफल रहा, डॉक्टरों ने बताया चमत्कार

तमाम चुनौतियों के बावजूद ऑपरेशन सफल रहा. डॉक्टरों के मुताबिक सर्जरी के बाद एलॉडी में न तो कोई न्यूरोलॉजिकल कमी दिखाई दी और न ही संक्रमण के संकेत मिले. यह उनकी चोट की गंभीरता को देखते हुए बड़ी राहत थी. अब उनकी सेहत में लगातार सुधार हो रहा है. डॉक्टर खंडेलवाल ने बताया कि एलॉडी की हालत में सुधार देखकर भारतीय टीम के कई सदस्य भावुक हो गए थे. उन्होंने इस अनुभव को एक शब्द में बयां किया- ‘चमत्कार’.

मॉरीशस ने भारत से मदद लेने पर क्या कहा?

इस बीच मॉरीशस में भारत से विशेषज्ञ बुलाने को लेकर सवाल भी उठे. स्वास्थ्य मंत्री अनिल बच्चू ने फेसबुक पर सफाई देते हुए कहा कि इस मामले में सबसे जरूरी मरीज की जान बचाना था. उन्होंने लिखा, ‘इस मामले की असाधारण जटिलता को देखते हुए हमारी प्राथमिकता ऐसे बेहद अनुभवी विशेषज्ञों की मदद लेना था जिन्हें इस तरह की सर्जरी का खास अनुभव हो और जिनके साथ हमारे पेशेवर संबंध और भरोसा पहले से हो.’ भारत के उच्चायुक्त अनुराग श्रीवास्तव ने डॉक्टरों की भारत वापसी से पहले उनसे मुलाकात की. उन्होंने इस सहयोग को दोनों देशों के रिश्तों की मिसाल बताया. श्रीवास्तव ने कहा, ‘यह सहयोग हमारी साझेदारी और पारिवारिक रिश्तों की बेहतरीन भावना को दिखाता है.’

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