दिल्ली में प्रदूषण से निपटने का सीक्रेट प्लान! दिवाली के बाद कृत्रिम बारिश की तैयारी, 15 दिन में दो ट्रायल
Raisina News Desk- नवंबर 05, 2026 11:53 AM IST
दिल्ली की जहरीली हवा से निपटने के लिए सरकार अब बारिश कराने की तैयारी में जुटी है. दिवाली के बाद अगर प्रदूषण का स्तर और बढ़ता है, तो दिल्ली में कृत्रिम बारिश यानी आर्टिफिशियल रेन कराई जा सकती है. TV9 भारतवर्ष को टॉप सोर्सेज से मिली जानकारी के मुताबिक, दिल्ली सरकार ने इसके लिए पिछले 15 दिनों में दो ट्रायल किए हैं. ये दोनों ट्रायल दिल्ली एयरपोर्ट के आसपास किए गए. इस समय ही दिल्ली के अधिकांश इलाकों में AQI 400 पार है.
खास बात ये है कि क्लाउड सीडिंग की इस पूरी कवायद में IIT कानपुर की मदद ली गई है. सूत्रों के मुताबिक, इस बार क्लाउड सीडिंग का परीक्षण पहले के मुकाबले ज्यादा ऊंचाई पर किया गया है. पिछले साल जहां करीब 10 हजार की ऊंचाई पर प्रयोग हुआ था, वहीं इस बार करीब 30 हजार की ऊंचाई पर ट्रायल किए जाने की जानकारी सामने आई है. यानी दिवाली के बाद दिल्ली की हवा बिगड़ती है, तो सरकार के पास कृत्रिम बारिश का विकल्प तैयार रखने की कोशिश है.
दिल्ली में हर साल सर्दियों की शुरुआत के साथ प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगता है. दिवाली के बाद पटाखों के धुएं, वाहनों के उत्सर्जन, निर्माण कार्यों की धूल और मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के चलते हवा की गुणवत्ता और खराब हो सकती है.इसी आशंका को देखते हुए दिल्ली सरकार ने कृत्रिम बारिश की तैयारी तेज कर दी है. सूत्रों के मुताबिक, सरकार की योजना है कि अगर दिवाली के बाद प्रदूषण का स्तर गंभीर स्थिति में पहुंचता है और बादलों में नमी समेत जरूरी मौसमी परिस्थितियां उपलब्ध होती हैं, तो क्लाउड सीडिंग के जरिए कृत्रिम बारिश कराने की कोशिश की जाए.
TV9 भारतवर्ष को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक, दिल्ली सरकार ने पिछले 15 दिनों में कृत्रिम बारिश कराने की तकनीक के दो ट्रायल किए हैं. ये परीक्षण दिल्ली एयरपोर्ट के आसपास किए गए. इन ट्रायल में IIT कानपुर की टीम की मदद ली गई. क्लाउड सीडिंग के लिए विमान के जरिए बादलों तक पहुंचने और वहां जरूरी पदार्थ छोड़ने की तकनीक का परीक्षण किया गया. इस प्रक्रिया में विशेष फ्लेयर्स के जरिए बादलों में ऐसे कण पहुंचाए जाते हैं, जो अनुकूल परिस्थितियों में पानी की बूंदें बनने और बारिश की प्रक्रिया को बढ़ावा दे सकते हैं.
इस बार के ट्रायल में ऊंचाई को लेकर भी खास बदलाव की जानकारी सामने आई है. सूत्रों के मुताबिक, पिछले साल करीब 10 हजार की ऊंचाई पर क्लाउड सीडिंग की गई थी, जबकि इस बार करीब 30 हजार की ऊंचाई पर परीक्षण किए जाने की बात सामने आई है. यानी इस बार प्रयोग में पहले से अधिक ऊंचाई पर क्लाउड सीडिंग की तकनीक को परखा गया है. IIT कानपुर की मदद से किए गए इन परीक्षणों के जरिए तकनीकी क्षमता और ऑपरेशन की तैयारियों का आकलन किया जा रहा है.
दिल्ली में कृत्रिम बारिश का प्रयोग पहली बार नहीं हो रहा है. पिछले साल भी दिल्ली सरकार ने IIT कानपुर के साथ मिलकर क्लाउड सीडिंग का पायलट प्रोजेक्ट चलाया था. अक्टूबर 2025 में दिल्ली के ऊपर दो क्लाउड सीडिंग ट्रायल किए गए थे. उस दौरान विमान से बादलों में फ्लेयर्स छोड़े गए थे. हालांकि, दिल्ली में अपेक्षित बारिश दर्ज नहीं हुई थी. विशेषज्ञों ने इसके पीछे बादलों में पर्याप्त नमी की कमी को एक वजह बताया था. पिछले साल के प्रयोग से मिले अनुभव के बाद अब सरकार फिर से इस तकनीक को परख रही है.