क्लासरूम में नौ साल की बच्ची की मौत: 'सीपीआर मिलता तो बच जाती बेटी, 7 KM दूर अस्पताल क्यों गए?'; पिता के सवाल

क्लासरूम में नौ साल की बच्ची की मौत: 'सीपीआर मिलता तो बच जाती बेटी, 7 KM दूर अस्पताल क्यों गए?'; पिता के सवाल



पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार फेज-2 स्थित स्कूल में क्लासरूम के भीतर छात्रा के गिरने और उसकी मौत के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं। छात्रा के माता-पिता के अलावा परिजनों ने स्कूल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। 

मासूम के पिता का आरोप है कि स्कूल प्रशासन बच्ची को इलाज के लिए करीब साढ़े 7 किलोमीटर दूर निर्माण विहार के एक निजी अस्पताल ले गया। यदि उनकी बेटी को महज चार किलोमीटर दूर मैक्स अस्पताल या 700 मीटर दूर एलबीएस अस्पताल ले जाया जाता तो शायद बेटी की जान बच सकती थी। 

 





घटना से पहले क्लासरूम का नजारा
– फोटो : वीडियो ग्रैब


पिता का कहना था कि यदि उनकी बेटी को हार्ट अटैक हुआ था तो ऐसे में शुरुआती चंद मिनट पीड़ित की जान बचाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इसको लेकर स्कूल ने लापरवाही बरती। छात्रा के पिता ने बताया कि स्कूल प्रशासन छात्रों से मोटी फीस वसूलता है। इसके अलावा दावा किया जाता है कि हर क्लासरूम में टीचर के अलावा एक अटेंडेंट होता है, लेकिन जब उनकी बेटी के साथ हादसा हुआ तो क्लासरूम में बस एक ही टीचर थी। 


घटना से पहले क्लासरूम का नजारा
– फोटो : वीडियो ग्रैब


छात्रा जब अचेत होकर फर्श पर गिरी तो टीचर ने फौरन छात्रा को उठा लिया। सीसीटीवी फुटेज में दिखता है कि छात्रा को उठाकर डेस्क पर बिठाने का प्रयास किया गया, लेकिन टीचर से बच्ची संभली नहीं और वह डेस्क से नीचे गिर गई। पिता ने बताया कि यदि उनकी बेटी को क्लासरूम में ही सीपीआर दिया जाता तो शायद उसकी जान बच जाती, लेकिन स्कूल में किसी ने उसे सीपीआर देने की कोशिश नहीं की। 


घटना से पहले क्लासरूम का नजारा
– फोटो : वीडियो ग्रैब


परिजनों ने बताया कि यदि एंबुलेंस बुलाकर बच्ची को अस्पताल ले जाया जाता तो शायद उसमें मौजूद डॉक्टर उसे बचाने के प्रयास करता। छात्रा को निजी कार में अस्पताल ले जाया गया। परिवार का आरोप है कि स्कूल प्रशासन ने सब कुछ खुद ही करवा लिया। बच्ची की मौत के बाद मां को काफी देर बाद कॉल किया।


घटना से पहले क्लासरूम का नजारा
– फोटो : वीडियो ग्रैब


स्कूल के पास एक जूस की दुकान के बाहर छात्रा की मां को स्कूल प्रशासन मिला। उनको बच्ची की मौत के बारे में कुछ नहीं बताया। बाद में अस्पताल पहुंचने पर परिवार को बच्ची की मौत का पता चला। पिता ने कहा कि परिवार को अस्पताल में अकेला छोड़कर स्कूल प्रशासन वहां से चला गया। वहीं, चाचा ने आरोप लगाया कि बच्ची को जानबूझकर स्कूल से संबंध रखने वाले अस्पताल ले जाया गया।


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