दिल्ली-हावड़ा , दिल्ली-मुंबई समेत 7 रेल रूटों पर बढ़ेगी ट्रेनों की रफ्तार: रेल मंत्री ने बताया प्लान
Raisina News Desk- अगस्त 27, 2026 08:35 PM IST

अगर आप दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई या गुवाहाटी रूट पर ट्रेन से सफर करते हैं और घंटों लेट होने वाली ट्रेनों से परेशान रहते हैं, तो आने वाले वर्षों में आपकी यह समस्या काफी हद तक कम हो सकती है. दरअसल भारतीय रेलवे देश के सबसे व्यस्त 11 हजार किलोमीटर लंबे हाई डेंसिटी नेटवर्क को 4-लेन यानी चार ट्रैक वाला बनाने जा रहा है. इससे ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी, देरी घटेगी, नई ट्रेनें चलाने की जगह बनेगी और यात्रियों के साथ-साथ माल ढुलाई को भी बड़ा फायदा मिलेगा. रेलवे के मुताबिक देश का करीब 41 प्रतिशत रेल ट्रैफिक सिर्फ 7 बड़े कॉरिडोरों से गुजरता है, जिन्हें अब फोर-ट्रैक नेटवर्क में बदला जाएगा.
More tracks ➡️ less congestion ➡️ more trains ➡️ faster journey pic.twitter.com/RjlLls4PEh
— Ashwini Vaishnaw (@AshwiniVaishnaw) August 26, 2026
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया है कि भारतीय रेलवे हाई डेंसिटी नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है. यह नेटवर्क करीब 11 हजार किलोमीटर लंबा है और देश के कुल रेल ट्रैफिक का लगभग 41 प्रतिशत हिस्सा संभालता है, जबकि यह पूरे रेल नेटवर्क का केवल 16 प्रतिशत हिस्सा ही है. बढ़ते यात्री और माल परिवहन के दबाव को देखते हुए इन मार्गों पर क्षमता बढ़ाना जरूरी माना जा रहा है.इन मार्गों पर देश की कई प्रमुख राजधानी, वंदे भारत, सुपरफास्ट ट्रेनों के साथ मालगाड़ियों की भी भारी आवाजाही रहती है. रेलवे का कहना है कि अतिरिक्त ट्रैक बनने से नेटवर्क पर दबाव कम होगा और नई ट्रेनों के संचालन के लिए भी जगह बन सकेगी
रेल मंत्री के मुताबिक जिन सात प्रमुख रेल कॉरिडोरों को 4-लेन बनाने की योजना है, उनमें शामिल हैं:
ये रूट देश के प्रमुख महानगरों, औद्योगिक शहरों, बंदरगाहों और व्यापारिक केंद्रों को जोड़ते हैं. इन्हीं मार्गों पर सबसे ज्यादा यात्री और मालगाड़ियां संचालित होती हैं.
अभी कई व्यस्त रूटों पर दो या तीन लाइनें उपलब्ध हैं. यही वजह है कि यात्री ट्रेनों और मालगाड़ियों को एक-दूसरे के लिए इंतजार करना पड़ता है. कई बार ट्रेनों को सिग्नल नहीं मिलने या ट्रैक खाली नहीं होने के कारण देरी का सामना करना पड़ता है.फोर-ट्रैकिंग के बाद इन मार्गों पर चार रेल लाइनें उपलब्ध होंगी. इससे अलग-अलग ट्रैक पर ज्यादा ट्रेनें चलाई जा सकेंगी और रेल यातायात का दबाव कम होगा. रेलवे की इस योजना का सबसे बड़ा फायदा आम यात्रियों को मिलने की उम्मीद है.रेलवे का मानना है कि बढ़ती यात्री संख्या को संभालने के लिए क्षमता विस्तार बेहद जरूरी है.
ये भी पढ़ें: अब बदल जाएगा Instagram-Facebook का खेल ! 1.5 लाख करोड़ रुपये जुर्माना देकर भी नहीं छूटा जुकरबर्ग का पीछा
दिल्ली-हावड़ा और दिल्ली-मुंबई देश के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में शामिल हैं. राजधानी, दुरंतो, वंदे भारत, मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों के साथ बड़ी संख्या में मालगाड़ियां भी इन रूटों का इस्तेमाल करती हैं.इसी तरह दिल्ली-चेन्नई, हावड़ा-चेन्नई और दिल्ली-गुवाहाटी कॉरिडोर उत्तर, पूर्वोत्तर, दक्षिण और पश्चिम भारत को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इन रूटों पर अतिरिक्त ट्रैक बनने से पूरे नेटवर्क की क्षमता बढ़ेगी. रेलवे की यह परियोजना केवल यात्री ट्रेनों के लिए नहीं है. देश में कोयला, स्टील, सीमेंट, कंटेनर और अन्य औद्योगिक सामान की बड़ी मात्रा रेल मार्ग से ढोई जाती है. अतिरिक्त ट्रैक उपलब्ध होने पर मालगाड़ियों की आवाजाही भी तेज होगी. इससे उद्योगों को फायदा मिलेगा और लॉजिस्टिक्स लागत कम करने में मदद मिल सकती है. रेलवे का मानना है कि मजबूत माल परिवहन नेटवर्क आर्थिक गतिविधियों को भी गति देगा.
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक हाई डेंसिटी नेटवर्क की फोर-ट्रैकिंग केवल ट्रैक बढ़ाने की योजना नहीं है, बल्कि रेलवे को भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार करने की रणनीति का हिस्सा है. इसका मकसद ज्यादा क्षमता, कम परिवहन लागत और बेहतर एवं स्वच्छ परिवहन व्यवस्था विकसित करना है.
ये भी पढ़ें: Fanta के बाद KitKat, Maggi और Sting पर भी सवाल ! क्या भारत में अलग रेसिपी से बेच रहे हैं बड़े ब्रांड ?