सफदरजंग में किस हाल में थे सोनम वांगचुक? नॉर्थ कोरिया से क्यों की तुलना
Raisina News Desk- जुलाई 25, 2026 12:16 PM IST

समाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिनों बाद अपना अनशन समाप्त किया. दिल्ली के मेदांता अस्पताल में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से बातचीत के बाद उन्होंने अपना अनशन खत्म किया. अब अनशन खत्म होने के बाद सोनम वांगुचक ने कई मुद्दों पर विस्तार से बात की है. उन्होंने एक तरफ ट्रोल करने वालों को आड़े हाथों लिया तो दूसरी तरफ सफदरजंग में अपने हाल की जानकारी भी दी.
सोनम वांगचुक ने कहा कि वो अस्पताल एक छावी की तरह प्रतीत हो रहा था, हर चीज पर पाबंदी थी. मुझे कमरे से बाहर नहीं जाने दिया जा रहा था. कोई परिंदा भी वहां पर नहीं मार सकता था. कमरे में किसी से भी मिलने की अनुमति नहीं मिल रही थी. मैं अपने संदेश में भी नैपकिन पेपर प लिखकर भेजता था, वो भी कभी-कबार जब्त कर लिए जाते थे.
सोनम ने आगे कहा कि लद्दाख से मेरे कई रिश्तेदार मिलने आए थे, लेकिन उन्हें वापस भेज दिया गया. ये सब पूरी तरह अवैध था, नॉर्थ कोरिया जैसी स्थिति बन गई थी. समाजिक कार्यकर्ता ने इस मुश्किल समय में पत्नी गीतांजलि से मिले सपोर्ट को लेकर भी शुक्रिया अदा किया है. उनका कहना है कि ये मेरी पत्नी गीतांजलि का कमाल है कि रविवार के दिन भी दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हो पाई. वहां इस बात को स्वीकार किया गया कि मैं एक आजाद नागरिक हूं और किसी भी अस्पताल में जा सकता हूं.
समाजिक कार्यकर्ता ने आरोप लगाया कि हाई कोर्ट के आदेश के बाद भी उन्हें पांच घंटों तक सफदरजंग अस्पताल में ही रखा गया. उनके मुताबिक अस्पताल वाले तर्क देते रहे कि हाई कोर्ट का आदेश अब तक उन तक नहीं पहुंचा है, ऐसे में उन्हें रिलीज नहीं किया जा सकता.
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इससे पहले सोनम वांगचुक ने एक जारी वीडियो में इस बात पर अफसोस जताया था कि उनकी नीयत पर सवाल उठाए गए. सोनम वांगचुक ने अपने वीडियो संदेश जारी कर कहा कि 26 दिन के अनशन के बाद उन्हें इस बात का दुख और हैरानी है कि अनशन खत्म करने को लेकर उन पर सवाल उठाए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि अगर उन्हें कोई सौदा या समझौता ही करना होता तो इसके लिए 26 दिन तक भूखा रहने और अपनी सेहत दांव पर लगाने की जरूरत नहीं पड़ती. वांगचुक ने बताया कि लंबे अनशन के कारण उनका 11 किलो वजन कम हुआ और उनकी शारीरिक स्थिति काफी कमजोर हो गई थी.