IAS दिव्या मित्तल का इस्तीफा मंजूर होगा या नहीं? जानें आईएएस गोपीनाथन का त्यागपत्र 7 साल से क्यों अटका?
Raisina News Desk- अगस्त 30, 2026 10:34 PM IST

IAS दिव्या मित्तल ने भारतीय प्रशासनिक सेवा से त्यागपत्र दे दिया. 30 अगस्त 2026 को उनके इस्तीफे की जानकारी सामने आते ही एक बार फिर से आईएएस अफसरों का नौकरी से मोहभंग होना चर्चा में है. सवाल यह भी उठ रहा कि क्या सरकार आईएएस दिव्या मित्तल का इस्तीफा मंजूर करेगी या नहीं? इस बीच एक ऐसे आईएएस अधिकारी के बारे में भी जानिए, जिनका इस्तीफा बीते सात साल से स्वीकार ही नहीं हो रहा. नाम है आईएएस कन्नन गोपीनाथन.
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ आईएएस कन्नन गोपीनाथन. Photo- @naukarshah
कन्नन गोपीनाथन अरुणाचल प्रदेश-गोवा-मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश कैडर के 2012 बैच के आईएएस अधिकारी हैं. 21 अगस्त 2019 को आईएएस पद से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने 13 अक्टूबर 2025 को कांग्रेस पार्टी ज्वाइन कर ली. वे अपने इस्तीफे को स्वीकार करने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अनुरोध भी कर चुके हैं.
कांग्रेस पार्टी ज्वाइन करते आईएएस कन्नन गोपीनाथन Photo- @naukarshah
Dear PM @narendramodi, now that you have started accepting resignations, please accept mine.
It’s been 7 years!! 😄
— Kannan Gopinathan (@naukarshah) July 27, 2026
कन्नन गोपीनाथन ने यह पोस्ट उस वक्त की थी, जब दिल्ली में सीजेपी द्वारा शुरू किए गए जनरेशन-जेड के हफ्तों के विरोध प्रदर्शनों के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया था. उनकी एक पोस्ट पर जब एक यूजर ने पूछा कि क्या उनकी नौकरी बरकरार रहने के कारण सरकार उन्हें वेतन दे रही है, तो गोपीनाथन ने जवाब दिया, “नहीं. न वेतन, न निलंबन, कुछ भी नहीं. बस चुपचाप बैठे हैं, बाकी सभी मुद्दों की तरह.”
who is ias kannan gopinathan resignation not accepted
साल 2019 में 33 वर्ष की उम्र में भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देने के बाद कन्नन गोपीनाथन ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा था कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद 20 दिनों तक वहां लाखों लोगों के मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया था. इस मुद्दे पर बोलने की वजह से उनको इतना परेशान किया गया कि उन्होंने आईएएस पद से इस्तीफा दे दिया.
कन्नन गोपीनाथन का जन्म 12 दिसंबर 1985 को केरल के कोट्टायम जिले में सरकारी क्लर्क के.एन. गोपीनाथन और वी.आर. कुमारी के घर हुआ था. उन्होंने पलक्कड़ जिले से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की. इसके बाद झारखंड के रांची स्थित बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मेसरा से इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स में इंजीनियरिंग की डिग्री ली.
इंजीनियरिंग करने के बाद उन्होंने नोएडा स्थित फ्रीस्केल सेमीकंडक्टर में वीएलएसआई (VLSI) डिजाइन इंजीनियर के रूप में करीब चार साल तक जॉब किया. इस दौरान वे ‘एसोसिएशन फॉर इंडियाज डेवलपमेंट’ संस्था से जुड़े रहे और नोएडा की एक झुग्गी बस्ती के बच्चों को पढ़ाते रहे. उन्हीं दिनों उनकी मुलाकात सॉफ्टवेयर इंजीनियर हिमानी पाठक से हुई. दोस्ती प्यार में बदली और बाद में दोनों ने शादी कर ली.
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इंजीनियर की जॉब छोड़कर कन्नन गोपीनाथन ने यूपीएससी की तैयारी शुरू की. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा 2011 में अखिल भारतीय स्तर पर उन्होंने 59वीं रैंक हासिल की और एजीएमयूटी कैडर में आईएएस अधिकारी बने. उन्होंने दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव में भी सेवाएं दीं. वे मिजोरम के आइजोल में भी कलेक्टर रहे.
आईएएस व आईपीएस जैसी अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों के इस्तीफे स्वीकार व अस्वीकार करने की बाकायदा एक प्रक्रिया है. अखिल भारतीय सेवा (मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति लाभ) नियम, 1958 का नियम 5(1A) के तहत किसी आईएएस अधिकारी का त्यागपत्र तभी स्वीकार होता जब राज्य सरकार की सिफारिश पर केंद्र सरकार का कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की मंजूरी मिलती है.
अगर किसी आईएएस के खिलाफ कोई अनुशासत्मक कार्रवाई या जांच लंबित है तो इस्तीफा खारिज भी किया जा सकता है. यह भी प्रावधान है कि कोई आईएएस इस्तीफा देने के 90 दिन में उचित वजह बताकर इसे वापस भी ले सकता है. ऐसे में सरकार इस्तीफे की वापसी की अनुमति दे सकती है. बस शर्त यह है कि आईएएस ने किसी राजनीतिक पार्टी में शामिल होने या निजी नौकरी के लिए त्यागपत्र नहीं दिया हो.
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