Ship Attack: होर्मुज, लाल सागर, काला सागर, हर जगह जहाज निशाने पर, भारत की टेंशन क्यों बढ़ गई?
Raisina News Desk- जुलाई 25, 2026 12:21 PM IST
होर्मुज, लाल सागर, काला सागर, हर जगह जहाज निशाने पर, भारत की टेंशन क्यों बढ़ी?
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जहाज पर हुआ हमला. (फाइल फोटो/सांकेतिक/Reuters)
दुनिया में कई मोर्चों पर जंग चल रही है. ये लड़ाई सिर्फ जमीन पर नहीं लड़ी जा रही. अब मिसाइलों और ड्रोन का निशाना युद्धपोत नहीं, बल्कि तेल, अनाज और सामान ढोने वाले व्यापारिक जहाज बनते जा रहे हैं. यमन के हूती विद्रोहियों ने हाल ही में लाल सागर में दो सऊदी तेल टैंकरों पर हमला किया. लेकिन यह घटना सिर्फ एक और समुद्री हमला नहीं है. यह उस नई युद्ध रणनीति की ओर इशारा करती है, जिसमें दुश्मन की सेना से पहले उसकी अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाने की कोशिश की जा रही है. पिछले कुछ महीनों में लाल सागर, होर्मुज जलडमरूमध्य और काला सागर तीनों समुद्री इलाकों में एक जैसी तस्वीर उभरकर सामने आई है. तीन अलग-अलग समुद्र में रणनीति एक जैसी दिख रही है. व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाकर वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव बनाया जा रहा है.
पहले समुद्री युद्धों में नौसेनाएं आमने-सामने लड़ती थीं. अब तस्वीर बदल चुकी है. तेल टैंकर, गैस जहाज, अनाज ढोने वाले मालवाहक और कंटेनर शिप नई लड़ाई के केंद्र में हैं. इसकी वजह भी साफ है. दुनिया का बड़ा हिस्सा समुद्री व्यापार पर निर्भर है. समुद्र के रास्ते तेल, गैस, खाने-पीने का सामान, उर्वरक, मशीनें और रोजमर्रा की जरूरत का सामान एक देश से दूसरे देश तक पहुंचता है. ऐसे में किसी एक बड़े व्यापारिक जहाज पर हमला सिर्फ उस जहाज को नहीं रोकता, बल्कि पूरी सप्लाई चेन में अनिश्चितता पैदा कर देता है.
हूतियों ने दावा किया कि उन्होंने लाल सागर में सऊदी तेल टैंकर ENCELA और LAYLIA पर मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया. इससे पहले हूती आम तौर पर इजरायल या उसके सहयोगियों से जुड़े जहाजों को निशाना बनाने की बात करते थे. लेकिन अब सीधे सऊदी तेल टैंकरों पर हमला यह संकेत देता है कि उनका अभियान नए चरण में पहुंच चुका है. लाल सागर दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में शामिल है. यही रास्ता बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य को स्वेज नहर से जोड़ता है. अगर यहां खतरा बढ़ता है, तो जहाजों को अफ्रीका के दक्षिणी सिरे केप ऑफ गुड होप का लंबा रास्ता अपनाना पड़ता है. इससे हजारों किलोमीटर की अतिरिक्त यात्रा, ज्यादा ईंधन खर्च, बढ़ा हुआ मालभाड़ा और महंगा बीमा सब कुछ जुड़ जाता है.
अगर लाल सागर अहम है, तो होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा बाजार की सबसे संवेदनशील नस माना जाता है. दुनिया के समुद्री रास्ते से होने वाले तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी संकरे मार्ग से गुजरता है. ईरान और अमेरिका के बीच बढ़े तनाव के बाद इस इलाके में भी कई व्यापारिक जहाज हमलों, ड्रोन और विस्फोटक नौकाओं के खतरे का सामना कर चुके हैं. इसका असर तुरंत वैश्विक तेल बाजार पर दिखाई देता है. शिपिंग कंपनियां रास्ता बदलती हैं, बीमा प्रीमियम बढ़ जाते हैं और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने लगती है.
रूस-यूक्रेन युद्ध ने काला सागर को भी व्यापारिक जहाजों के लिए जोखिम भरा बना दिया है. बंदरगाहों, अनाज टर्मिनलों और मालवाहक जहाजों पर हमलों ने साबित कर दिया है कि अब सप्लाई लाइन भी युद्ध का हिस्सा बन चुकी है. इसी संघर्ष के दौरान यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह से निकल रहे कार्गो जहाज MV Golden Leo पर हुए हमले में चार भारतीय नाविकों की मौत हो गई. यह घटना इस बात का बड़ा उदाहरण है कि युद्ध से सीधे जुड़े नहीं होने के बावजूद नागरिक नाविक भी अब सबसे बड़े खतरे का सामना कर रहे हैं.
इन हमलों का असर सिर्फ युद्ध वाले देशों तक सीमित नहीं रहता. समुद्री रास्ते लंबे होते हैं, बीमा महंगा होता है, माल ढुलाई की लागत बढ़ती है और आखिरकार इसकी कीमत उपभोक्ताओं को चुकानी पड़ती है. पेट्रोल-डीजल से लेकर खाने-पीने की चीजों और आयातित सामान तक, हर चीज प्रभावित हो सकती है.
भारत दुनिया के सबसे बड़े समुद्री व्यापार वाले देशों में शामिल है और लाखों भारतीय नाविक पूरी दुनिया में जहाजों पर काम करते हैं. पिछले कुछ वर्षों में भारतीय नाविक काला सागर और होर्मुज क्षेत्र दोनों में हमलों की चपेट में आ चुके हैं. यही वजह है कि यह सिर्फ पश्चिम एशिया या यूरोप की समस्या नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार और भारतीय नाविकों की सुरक्षा से भी सीधे जुड़ा हुआ मुद्दा है.
Yogendra Mishra holds a degree in Journalism from the University of Allahabad. He has been actively associated with the media industry since 2017 and brings extensive experience across various domains of journa…
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