क्या होता है एयर टर्बुलेंस, हवा में कैसे डगमगाने लगता है विमान? जानिए कितना खतरनाक
Raisina News Desk- अगस्त 04, 2026 10:57 PM IST

मंगलवार को एअर इंडिया की एक फ्लाइट फुकेट से दिल्ली आ रही थी. यात्रा के दौरान विमान अचानक हल्के टर्बुलेंस की चपेट में आ गया जिसके कारण उसे कुछ देर के लिए ऊंचाई कम करनी पड़ी. राहत की बात यह रही कि इस घटना में कोई भी यात्री गंभीर रूप से घायल नहीं हुआ.
हालांकि, इस घटना के बाद एक सवाल फिर लोगों के मन में उठने लगा- आखिर एयर टर्बुलेंस होता क्या है? कई बार हमने देखा है कि उड़ान के दौरान विमान अचानक ऊपर-नीचे होने लगता है. कभी ऐसा लगता है कि विमान तेजी से नीचे आ रहा है, तो कभी ऊपर उठ रहा है. आखिर ऐसा क्यों होता है? इसके पीछे क्या वजह होती है? आइए, इसे आसान भाषा में समझते हैं.
आसमान में हवा कभी भी एक जैसी नहीं होती. कहीं हवा तेज होती है, कहीं धीमी. कहीं वह ऊपर की ओर उठ रही होती है तो कहीं नीचे की ओर जा रही होती है. जब कोई विमान ऐसी अस्थिर हवा वाले क्षेत्र से गुजरता है तो उसमें अचानक झटके महसूस होने लगते हैं. इसी स्थिति को एयर टर्बुलेंस कहा जाता है.
कारण नंबर 1- खराब मौसम
टर्बुलेंस की सबसे बड़ी वजह खराब मौसम होता है. जब बड़े-बड़े बादलों के भीतर हवा बहुत तेजी से ऊपर-नीचे चलती है और विमान उस क्षेत्र से गुजरता है तो उसमें तेज झटके महसूस हो सकते हैं.
कारण नंबर 2- पहाड़ों की वजह से
अगर तेज गति से चल रही हवा किसी पहाड़ से टकराती है तो उसके पीछे हवा में लहरें बन जाती हैं. जब कोई विमान इन लहरों के बीच से गुजरता ह तो उसमें भी झटके महसूस होते हैं. इसे माउंटेन वेव टर्बुलेंस कहा जाता है.
कारण नंबर 3- गर्म और ठंडी हवा के मिलने से
दिन के समय जमीन गर्म हो जाती है. गर्म हवा ऊपर उठती है जबकि ठंडी हवा नीचे आती है. हवा के इसी ऊपर-नीचे होने से वातावरण में हलचल पैदा होती है. जब विमान इस क्षेत्र से गुजरता है तो उसे टर्बुलेंस महसूस होता है. तकनीकी भाषा में इसे थर्मल टर्बुलेंस कहा जाता है.
कारण नंबर 4- साफ मौसम में भी हो सकता है टर्बुलेंस
एक प्रकार का टर्बुलेंस ऐसा भी होता है जिसमें न बादल होते हैं और न ही बारिश. इसके बावजूद विमान झटके महसूस करता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बहुत अधिक ऊंचाई पर तेज हवाएं अलग-अलग गति से चल रही होती हैं. इन्हें जेट स्ट्रीम कहा जाता है. जब विमान इन हवाओं के बीच पहुंचता है तो उसे क्लियर एयर टर्बुलेंस महसूस हो सकता है.
टर्बुलेंस को उसकी तीव्रता के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा जाता है-
हल्का: इसमें विमान लगभग 1 मीटर तक ऊपर-नीचे हो सकता है. कई बार यात्रियों को इसका एहसास भी नहीं होता.
मध्यम: इसमें विमान करीब 3 से 6 मीटर तक ऊपर-नीचे हो सकता है. यात्रियों को स्पष्ट झटके महसूस होते हैं और सीट बेल्ट बांधकर रखना जरूरी होता है.
तेज: इसमें विमान करीब 30 मीटर तक ऊपर-नीचे हो सकता है. अगर किसी यात्री ने सीट बेल्ट नहीं लगाई हो तो उसे चोट भी लग सकती है.
असल में टर्बुलेंस अक्सर हवा की एक सीमित परत में होता है. उदाहरण के लिए, जेट स्ट्रीम के आसपास का क्षेत्र लगभग 2,000 फीट ऊपर या नीचे जाने पर बदल सकता है.
इसी वजह से पायलट मौसम का रडार, एयर ट्रैफिक कंट्रोल से बात कर और अन्य विमानों की रिपोर्ट देखकर फैसला लेता है कि विमान की ऊंचाई बढ़ानी है या घटानी है. कई बार तो सिर्फ कुछ हजार फीट ऊपर या नीचे विमान को करने से भी टर्बुलेंस वाले क्षेत्र से बाहर निकला जा सकता है. ऐसा भी इसलिए होता है क्योंकि अलग-अलग ऊंचाई पर हवा की गति भी अलग रहती है.