ट्रेन के हर हॉर्न में छिपे हैं कोड वर्ड, लोको पायलट और गार्ड के बीच होती है 'गुप्त बातचीत'; पैसेंजर का जानना बेहद जरूरी
Raisina News Desk- सितंबर 21, 2026 07:38 PM IST
आप रेलवे प्लेटफॉर्म पर खड़े हैं. एक हाथ में चाय का कुल्हड़ है, दूसरे हाथ में मोबाइल, और पैरों के पास रखा है सामान. स्टेशन पर अनाउंसमेंट गूंज रही है, लोगों की भारी भीड़ इधर-उधर डोल रही है, और तभी… एक तेज हॉर्न की आवाज इस पूरे शोर को चीरती हुई आपके कानों तक पहुंचती है. हम सब ने इस दमदार आवाज को जिंदगी में हजारों बार सुना होगा. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ट्रेन का हर हॉर्न महज एक शोर नहीं, बल्कि एक बेहद जरूरी संदेश होता है? यह ट्रेन ड्राइवर और गार्ड के बीच का एक गुप्त कोड है, जो हमारी भारतीय रेलवे को सुरक्षित चलाता है.
भारतीय रेलवे में कुल 11 तरह के हॉर्न पैटर्न का इस्तेमाल किया जाता है. प्रस्थान की सूचना से लेकर किसी बड़ी इमरजेंसी तक, हर बात के लिए एक अलग हॉर्न तय है.
रेलवे के सफर में हॉर्न सबसे पुराना और सबसे भरोसेमंद सुरक्षा हथियार है. शोर से भरे स्टेशनों और मीलों दूर तक अपनी बात तुरंत पहुंचाने के लिए इससे बेहतर कोई जरिया नहीं है. भारतीय रेलवे के पास हॉर्न बजाने के बेहद कड़े और तय नियम हैं, जिनका पूरे देश में कड़ाई से पालन किया जाता है. हर ड्राइवर को ट्रेनिंग के दौरान इन सिग्नलों को रटाया जाता है.
1. एक छोटा हॉर्न- ट्रेन यार्ड में जा रही है
इंजन मानो धीरे से कह रहा है कि भाई, अब थोड़ा आराम और सर्विसिंग का वक्त है.
2. दो छोटे हॉर्न- चलने के लिए तैयार
ड्राइवर गार्ड से हरी झंडी दिखाने को कह रहा है. यात्रियों के लिए इशारा है कि मोबाइल से नजरें हटाएं और फटाफट डिब्बे में चढ़ें.
3. तीन छोटे हॉर्न- इमरजेंसी हालात
ड्राइवर का कंट्रोल ट्रेन से छूट गया है और गार्ड को तुरंत वैक्यूम ब्रेक खींचने की जरूरत है. यह खतरे की घंटी है.
4. चार छोटे हॉर्न- तकनीकी खराबी
ट्रेन में कोई खराबी आ गई है और फिलहाल चक्के आगे नहीं बढ़ पाएंगे. पहले मरम्मत होगी, फिर सफर शुरू होगा.
5. एक लंबा+एक छोटा हॉर्न- ब्रेक पाइप की जांच
ड्राइवर गार्ड से ब्रेक सिस्टम को ठीक से सेट करने के लिए कह रहा है ताकि सुरक्षित प्रस्थान हो सके.
6. दो लंबे + दो छोटे हॉर्न- आपसी तालमेल की जरूरत
गार्ड को तुरंत इंजन के पास ड्राइवर से बातचीत करने के लिए बुलाया जा रहा है.
7. लगातार बजने वाला हॉर्न- नॉन-स्टॉप ट्रेन
यह ट्रेन इस स्टेशन पर नहीं रुकेगी. प्लेटफॉर्म पर खड़े लोग तुरंत पटरी से सुरक्षित दूरी बना लें.
8. दो बार रुक-रुक कर हॉर्न- रेलवे क्रॉसिंग अलर्ट
ट्रेन फाटक के पास पहुंच रही है. आसपास के लोगों को अलर्ट रहने की चेतावनी दी जा रही है.
9. दो लंबे+एक छोटा हॉर्न- ट्रैक बदलना
ट्रेन अपनी पटरी बदलने वाली है. इसके लिए केबिन और सिग्नल स्टाफ का पूरा अलर्ट होना जरूरी है.
10. दो छोटे+एक लंबा हॉर्न- चेन पुलिंग या इमरजेंसी ब्रेक
किसी यात्री ने जंजीर खींची है या गार्ड ने अचानक ब्रेक लगाया है. क्रू तुरंत मामले की जांच में जुट जाता है.
हॉर्न सुनकर यात्री क्या करें?
डीजल इंजनों का हॉर्न काफी भारी और गूंजने वाला होता है, जो मीलों दूर तक सुनाई देता है. वहीं, इलेक्ट्रिक इंजनों की आवाज तीखी और कान फोड़ने वाली होती है. यह अंतर उनके अंदर लगी मशीनों और तकनीक की वजह से है. आवाज भले ही अलग हो, लेकिन उनका संदेश एक ही होता है.
भारतीय रेलवे तेजी से आधुनिक हो रही है. अब ‘कवच’ (ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन) जैसी एंटी-कोलिशन तकनीक और डिजिटल कम्युनिकेशन सिस्टम का इस्तेमाल बढ़ रहा है. आने वाले वक्त में मेट्रो और बिना ड्राइवर वाली ट्रेनों में शायद हॉर्न की आवाज बहुत कम सुनाई दे, लेकिन हमारे लंबे रूटों पर इसकी अहमियत को कोई रिप्लेस नहीं कर सकता.