बादल छाए पर दिल्ली NCR से क्यों रूठी बारिश, मॉनसून ने लिया लंबा ब्रेक, वैज्ञानिकों ने बताया- कब मिलेगी गुड न्यूज | Delhi NCR rain Explained Break Monsoon and Monsoon Trough behind low rainfall says IMD and skymet Weather scientist



नई दिल्ली:

Monsoon Rain Update: उत्तर प्रदेश, दिल्ली एनसीआर में मॉनसून ने दस्तक तो जोरदार तरीके से दी, लेकिन पूरे सीजन में जोरदार बारिश होने की खुशियां काफूर होती जा रही हैं. दिल्ली एनसीआर में पिछले 3-4 दिनों में मॉनसून की बारिश न के बराबर रही है और उमस फिर उलझन बढ़ा रही है. मौसम विभाग की मानें तो दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के हिस्से वाले उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में मॉनसून अचानक ठहर सा गया है. घने बारिश वाले बादलों की जगह साफ आसमान तपिश बढ़ा रहा है. 

मॉनसून धीमा क्यों हो गया है?

मौसम विशेषज्ञ मौजूदा सूखे दौर के पीछे मुख्य कारण ब्रेक मॉनसून यानी मॉनसून में रुकावट को मानते हैं. यह मॉनसून ट्रफ में बड़े बदलाव के साथ हो रहा है. ‘ट्रफ’ कम वायुमंडलीय दबाव वाला एक लंबा क्षेत्र होता है. यह आमतौर पर भारी बादल, नमी और बारिश लाता है, क्योंकि यह गर्म, नम हवा को ऊपर उठने के लिए मजबूर करता है. मौसम विभाग दो तरह के ट्रफ पर नजर रखता है, जो भारतीय मौसम को प्रभावित करते हैं, एक मॉनसून ट्रफ और दूसरा ऑफशोर ट्रफ.

मॉनसून ट्रफ का खिसकना

मॉनसून ट्रफ बारिश लाने वाली हवाओं के लिए एक हाईवे की तरह काम करता है, लेकिन अब ये उत्तर पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों से दूर चला गया है. मौसम केंद्र लखनऊ के वैज्ञानिक एम दानिश ने कहा, मॉनसून बेल्ट उत्तर प्रदेश के उत्तरी हिस्से में तराई बेल्ट की ओर खिसक गई है. इसलिए सिर्फ उत्तरी हिस्से में ही बारिश हो रही है. मॉनसून के धीमे होने पर उन्होंने कहा, धीमे होने का मतलब है मॉनसून ट्रफ का खिसकना। पिछले हफ़्ते कम दबाव वाला एक सिस्टम बना था, इसलिए यह उत्तरी हिस्से की ओर खिसक रहा है. इस कारण मॉनसून ट्रफ भी खिसक गया है.

यूपी के कुछ जिलों में बारिश, बाकी में सूखा

हिमालय की तलहटी में उत्तर की तरफ खिसकने के कारण बारिश UP में गोरखपुर, बलरामपुर और कुशीनगर और पूर्वी भारत तक ही सीमित रह गई है. इससे दिल्ली-NCR और पश्चिमी उत्तर प्रदेश सूखे रह गए हैं. मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मॉनसून का अभी जो सूखा दौर चल रहा है, ‘ब्रेक मॉनसून’ और मॉनसून ट्रफ (मानसून की कम दबाव वाली पट्टी) में बदलाव इसकी वजह है.मौसम का पैटर्न पूरी तरह से मॉनसून ब्रेक वाली स्टेज में आ गया है. 

दिल्ली एनसीआर में मॉनसून की बारिश लौटेगी

स्काईमेट वेदर में मौसम विज्ञान और जलवायु परिवर्तन के उपाध्यक्ष महेश पलावत का कहना है कि इससे इलाके की हवा और नमी पर क्या असर पड़ता है.पिछले कुछ दिनों से दिल्ली समेत उत्तर-पश्चिम भारत में मौसम पूरी तरह सूखा रहा है. इसकी वजह यह है कि ‘ब्रेक मॉनसून’ की स्थिति बनी है. पलावत ने कहा, दिल्ली एनसीआर से लेकर उत्तर-पश्चिम में सूखा दौर चल रहा है, वहीं देश के पूर्वी और पूर्वोत्तर हिस्सों में भारी बारिश हो रही है. पलावत उत्तर-पूर्वी बिहार, बांग्लादेश और उत्तर-पूर्वी असम के ऊपर साइक्लोनिक सर्कुलेशन की ओर इशारा करते हैं, जो बंगाल की खाड़ी से सारी नमी खींचकर उन इलाकों की ओर ले जा रहे हैं.

ब्रेक मॉनसून की स्थिति तब बनती है, जब मॉनसून ट्रफ की धुरी (एक्सिस) हिमालय की तलहटी की ओर खिसक जाती है. नतीजतन ट्रफ के दक्षिण में हवाएं पश्चिम दिशा से चलने लगती हैं, चूंकि ये हवाएँ सूखी होती हैं, इसलिए नमी का स्तर तेजी से गिर जाता है. नमी में इस गिरावट से बारिश रुक जाती है, बादल नहीं बनते और तापमान बढ़ जाता है.
महेश पलावत, स्काईमेट वेदर के शीर्ष मौसम विज्ञानी

मॉनसून का लंबा ठहराव क्या अलनीनो का असर

मॉनसून में ब्रेक आना आम तौर पर मौसम की एक सामान्य घटना है, लेकिन यह सूखा दौर जो आमतौर पर 4 से 6 दिनों तक रहता है, उसके मुकाबले कहीं ज्यादा लंबा होता जा रहा है. मौसम विशेषज्ञ इस लंबे सूखे दौर को समझाने के लिए बड़े वैश्विक जलवायु परिवर्तनों की ओर इशारा कर रहे हैं.

ब्रेक मॉनसून लंबा हो गया

पलावत का कहना है कि ब्रेक मॉनसून की स्थिति आमतौर पर जुलाई और अगस्त के दौरान एक या दो बार होती है. ज्यादातर 4 से 5 दिन या ज्यादा से ज्यादा 6 दिन तक रहती है. लेकिन इस बार हम 11 से 12 दिनों के असामान्य रूप से लंबे ब्रेक को देख रहे हैं. हम इसे अलनीनो के असर से जोड़कर देख सकते हैं, जो अब हावी होने लगा है. इसका असर जुलाई के दूसरे भाग में साफ़ तौर पर दिखाई दे रहा है.

अलनीनो का असर दिखेगा

इस बदलाव का भारत में कुल बारिश के आंकड़ों पर तेजी से असर पड़ा है. 9 जुलाई तक जोरदार बारिश की वजह से मॉनसून की कमी घटकर सिर्फ 12 प्रतिशत रह गई थी. लेकिन सिर्फ तीन दिनों में यह कमी फिर से बढ़कर 18 प्रतिशत हो गई है. हमें देखना होगा कि मॉनसून आगे कैसा रहता है, लेकिन अभी साफतौर पर अलनीनो का असर दिख रहा है.

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दिल्ली-NCR और UP में बारिश कब लौटेगी?

अच्छी बात यह है कि बारिश में यह रुकावट सिर्फ कुछ समय के लिए है. मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और निजी मौसम पूर्वानुमान एजेंसियां संकेत दे रही हैं कि मॉनसून ट्रफ (कम दबाव का क्षेत्र) धीरे-धीरे दक्षिण की ओर बढ़ेगा और सूखे इलाकों में फिर से बारिश शुरू होगी. अगले तीन-चार दिनों तक उत्तर-पश्चिम, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में भारी बारिश की संभावना है. दिल्ली में आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहने की संभावना है और कोई खास बारिश नहीं होगी.

IMD लखनऊ के एम दानिश को उम्मीद है कि मौसमी प्रणालियां धीरे-धीरे दक्षिण की ओर बढ़ेंगी. बेल्ट के उत्तरी हिस्से में जो ट्रफ लाइन थी, वह अब दक्षिण की ओर बढ़ने लगी है. इसलिए मॉनसून फिर से सक्रिय हो रहा है.

स्काईमेट के महेश पलावत ने समयसीमा बताई है कि राजधानी दिल्ली और पड़ोसी राज्यों को कब बड़ी राहत मिलेगी. जब 20 जुलाई के बाद मॉनसून ट्रफ की यह धुरी दक्षिण की ओर बढ़ना शुरू करेगी, तो बारिश की गतिविधियां फिर से बढ़ने की उम्मीद है. इसलिए अभी एक हफ्ते का ब्रेक है, जिसके बाद पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में फिर से बारिश शुरू होगी और तापमान एक बार फिर गिरेगा. दिल्ली-NCR और पश्चिमी UP के लोगों को अभी गर्म, उमस भरे और ज्यादातर सूखे दिनों के लिए तैयार रहना होगा. महीने के आखिरी दस दिनों में मॉनसून की धुरी दक्षिण की ओर बढ़ने की तैयारी कर रही है.

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